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माफिया सरगनाओं का करीबी रहा सुरेंद्र हरदोई से है जिला पंचायत सदस्य

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लखनऊ। सुरेंद्र कालिया को लखनऊ का विकास दुबे कहा जाए तो कोई अतिशियोक्ति नहीं होगी। वह दुबे की ही तरह अपराध और राजनीति के गठजोड़ से आगे बढ़ा। कालिया खुद हरदोई के कछौना वार्ड नंबर एक तो उसकी पत्नी रीता वार्ड नंबर दो से जिला पंचायत सदस्य है। वह कछौना थाना का हिस्ट्रीशीटर है और हरदोई व लखनऊ समेत कई जनपदों में उसके खिलाफ गंभीर धाराओं के मुकदमे भी दर्ज हैं। हुसैनगंज से उसके खिलाफ वर्ष 2007 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई भी हो चुकी है।
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सुरेंद्र के माफिया सरगनाओं के अलावा कई राजनेताओं से नजदीकियां हैं। अयोध्या के एक माफिया और पूर्व विधायक का वह करीबी रहा है। इसके अलावा बसपा के एक अपराधी एमएलसी से भी उसके नजदीकी संबंध रहे हैं। वह अजीत सिंह के साथ भी रहा। माफिया सरगनाओं के वरदहस्त से ही उसने रेलवे के ठेकों में अपना दखल बढ़ाया। सूत्र बताते हैं कि सुरेंद्र ने रेलवे के ठेकेदार सतीश तिवारी उर्फ टनाटन तिवारी के साथ ठेकेदारी शुरू की थी। सतीश की पिछले साल एलडीए कॉलोनी में हत्या कर दी गई थी। हत्या के पीछे रेलवे के ठेकों का विवाद बताया जा रहा है लेकिन अंडरवर्ल्ड सूत्रों का कहना है कि उसने माफिया अतीक के रिश्तेदार की हत्या की थी जिसके बदले में उसे मारा गया। टनाटन तिवारी की मौत के बाद सुरेंद्र को उसका वारिस समझते हुए रेलवे के ठेके मिलने लगे।
रेलवे में ठेकेदारी करने वाले माफिया अतुल सिंह से भी उसकी तनातनी चलती है। पिछले साल ही उसका पूर्व सांसद और पूर्वांचल के बाहुबली के करीबी राकेश सिंह राणा से हजरतगंज स्थित डीआरएम ऑफिस में झगड़ा हुआ था जिसकी एफआईआर भी दर्ज है। हजरतगंज कोतवाली से वर्ष 2005 और 2006 में गुंडा एक्ट की कार्रवाई भी हो चुकी है। हालांकि, हमले के पीछे किसी माफिया का हाथ नहीं बताया जा रहा है।
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