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अमरमणि व मधुमणि दया की फिराक में

Thu, 07 Aug 2014 01:58 PM IST
लखनऊ/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क
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प्रदेश के बहुचर्चित मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी व उनकी पत्नी मधुमणि की दया याचिका खारिज करने के लिए मधुमिता की बहन निधि शुक्ला ने राजभवन पर दस्तक दी है।
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निधि ने बुधवार को राज्यपाल के प्रमुख सचिव राजीव कपूर से मिलकर प्रार्थना पत्र सौंपा जिसमें अमरमणि व मधुमणि की दया याचिका रद्द करने की मांग की गई है।

निधि का दावा है कि अमरमणि व मधुमणि ने राज्यपाल को व्यक्तिगत दया याचिका भेजी है। जबकि राजभवन के सूत्रों का कहना है कि अभी तक ऐसी कोई दया याचिका प्राप्त नहीं हुई है।

प्रमुख सचिव को राज्यपाल के नाम सौंपे गए प्रार्थना पत्र में निधि ने अमरमणि व मधुमणि पर साजिश रचकर मधुमिता की हत्या कराने का आरोप लगाते हुए कहा है कि पुलिस, सीबीसीआईडी व सीबीआई जांच में ये दोनों को मुख्य आरोपी ठहराए गए हैं।
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अमरमणि के राजनीतिक रसूख और प्रशासन पर जबरदस्त प्रभाव को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मधुमिता हत्याकांड की सुनवाई यूपी से हटाकर उत्तराखंड स्थानांतरित कर दी। उत्तराखंड की सत्र न्यायालय और उच्च न्यायालय ने अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई है।

प्रार्थना पत्र में निधि ने अमरमणि को पूर्वांचल का कुख्यात माफिया बताते हुए कहा है कि मधुमिता हत्याकांड से पहले ही उसके ऊपर संगीन धाराओं में 33 आपराधिक मुकदमे दर्ज है और वह ए ग्रेड का हिस्ट्रीशीटर अपराधी है।

निधि ने प्रार्थना पत्र में कहा है कि सजा होने के बाद से जेल में अमरमणि लगातार बीमारी का बहाना बनाकर विभिन्न अस्पतालों में रह रहा है।

इतना ही नहीं न्याय प्रक्रिया की आंखों में धूल झोंककर उत्तराखंड का यह कैदी अपने ऊपर दर्ज 33 मुकदमों को ढाल बनाकर उत्तराखंड के स्थान पर अपने गृह जनपद गोरखपुर में रह रहा है तथा बाबा राघवदास हास्पिटल गोरखपुर से अपने गिरोह का संचालन करके हम लोगों पर कातिलाना हमला कराने की साजिश रच रहा है।

तगड़े राजनीतिक रसूख के चलते यूपी में उसके ऊपर किसी प्रकार का नियंत्रण रख पाना शासन के लिए मुश्किल हो रहा है।

निधि ने पत्र में कहा है कि अमरमणि उसके व परिवार के लोगों की हत्या करवाने के लिए शासन सत्ता में बैठे अपने लोगों का हर प्रकार से प्रयोग कर रहा है।

अगर वह किसी प्रकार से जेल से बाहर आ गया तो मुझे व मेरे परिवार की दर्दनाक मौत देगा। इसके जेल से छूटने की स्थिति में हम परिजनों को तत्काल कोई निर्णय करना पड़ेगा।

11 साल से किए जा रहे इस संघर्ष के बाद हम अपना बलिदान चुपचाप हर्गिज नहीं देंगे। बड़ी मुश्किल से इंसाफ मिला है और यही हमारी जिंदगी है।

निधि ने राज्यपाल से गुहार लगाई है कि ऐसे खूंखार अपराधी की दया याचिका रद्द करके इंसाफ को कायम रखें।

राजभवन के सूत्रों ने निधि शुक्ला का प्रार्थना पत्र मिलने की बात स्वीकार करते हुए कहा है कि अमरमणि व मधुमणि की दया याचिका अभी प्राप्त नहीं हुई है।

जेल में रहते हुए चर्चा में रहे अमरमणि
जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे अमरमणि आमतौर पर चर्चाओं में रहते हैं। पिछले साल समाजवादी पार्टी की सरकार बनने के बाद उन्होंने जेल से ही लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव को कुशीनगर में तैनात लोक निर्माण विभाग के एक जेई का तबादला महाराजगंज करने के लिए सिफारिशी चिट्ठी भेजी।
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इससे पहले विधानसभा चुनाव लड़ रहे बेटे अमनमणि के लिए जेल से अपील जारी करने को लेकर भी वह चर्चा में आए थे।

सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत
मधुमिता हत्याकांड में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के उम्रकै द के फैसले के खिलाफ अमरमणि व मधुमणि ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट से इन दोनों को कोई राहत नहीं मिली। सर्वोच्च अदालत ने इनकी याचिका खारिज करते हुए सजा बरकरार रखी है।
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