रिजवी ने कहा कि भारत धर्म निरपेक्ष देश है। यहां धार्मिक आजादी है, लेकिन कुछ कट्टरपंथी मुसलमान इसका नाजायज फायदा उठाकर मजहब के नाम पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए मदरसों की आड़ में अपनी दुकान चला रहे हैं।
देश में इतने उलमा पहले से मौजूद हैं, अब और उलमा की जरूरत नहीं है। देश को इंजीनियर और डॉक्टर की जरूरत है जिसके लिए सभी मदरसों का आधुनिकीकरण किया जाना चाहिए। इनमें पढ़ रहे बच्चों को आधुनिक शिक्षा दी जानी चाहिए।
उलमा के बच्चे क्यों नहीं पढ़ते मदरसों में
रिजवी ने कहा कि शिया व सुन्नी सभी उलमा मेरे खिलाफ हैं, लेकिन सच कहने से मुझे कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि मेरी मुखालफत करने वाले ये उलमा खुद कान्वेंट में पढ़े हैं और इन्होंने गरीब मुसलमानों के बच्चों को अलिफ लाम मीम में अटका रखा है।
आखिर इन उलमा के बच्चे मदरसों में दीनी तालीम क्यों नहीं लेते। वे मिशनरी स्कूलों में इंग्लिश मीडियम में क्यों पढ़ रहे हैं।