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वक्फ बोर्ड चेयरमैन का एक और बड़ा बयान, बोले- अंडरवर्ल्ड से जुड़े हैं मदरसों के तार

Sun, 14 Jan 2018 10:09 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी - फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सैयद वसीम रिजवी के मदरसों में आतंकवादी गतिविधियों के बयान के बाद से मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शनिवार रात उन्हें परिवार समेत बम से उड़ा देने की धमकी दी गई थी।

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उन्होंने इसे कुछ कट्टरपंथियों के इशारे पर दी गई धमकी बताते हुए कहा कि कुछ मदरसों के मुल्ला के तार अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जुडे़ हैं। वह इन्हें आर्थिक मदद करता है। इसकी सख्त से सख्त जांच होनी चाहिए।

वसीम रिजवी ने रविवार को ‘अमर उजाला’ से बातचीत में बताया कि उन्हें मिली धमकी से साबित हो गया है कि मदरसों में क्या चल रहा है। उन्होंने कहा, मेरा बयान सभी मदरसों के लिए नहीं था, बल्कि ऐसे मदरसों के खिलाफ था जो गरीब मुसलमानों के बच्चों को दीनी तालीम के नाम पर विदेशों से धन बटोर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि देश में बढ़ रहे मदरसों को लेकर केंद्र व प्रदेश सरकारें सतर्क रहना चाहिए। उनकी गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। बच्चों के भविष्य से खेलने वाले वहाबी कट्टरपंथी मदरसों को बंद किया जाना चाहिए।

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देश को उलमा की नहीं, इंजीनियर, डॉक्टर की जरूरत

- फोटो : amar ujala
रिजवी ने कहा कि भारत धर्म निरपेक्ष देश है। यहां धार्मिक आजादी है, लेकिन कुछ कट्टरपंथी मुसलमान इसका नाजायज फायदा उठाकर मजहब के नाम पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए मदरसों की आड़ में अपनी दुकान चला रहे हैं।

देश में इतने उलमा पहले से मौजूद हैं, अब और उलमा की जरूरत नहीं है। देश को इंजीनियर और डॉक्टर की जरूरत है जिसके लिए सभी मदरसों का आधुनिकीकरण किया जाना चाहिए। इनमें पढ़ रहे बच्चों को आधुनिक शिक्षा दी जानी चाहिए।

उलमा के बच्चे क्यों नहीं पढ़ते मदरसों में  
रिजवी ने कहा कि शिया व सुन्नी सभी उलमा मेरे खिलाफ हैं, लेकिन सच कहने से मुझे कोई रोक नहीं सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि मेरी मुखालफत करने वाले ये उलमा खुद कान्वेंट में पढ़े हैं और इन्होंने गरीब मुसलमानों के बच्चों को अलिफ लाम मीम में अटका रखा है।

आखिर इन उलमा के बच्चे मदरसों में दीनी तालीम क्यों नहीं लेते। वे मिशनरी स्कूलों में इंग्लिश मीडियम में क्यों पढ़ रहे हैं।
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