पर्यटकों के चहेते और लखनऊ चिड़ियाघर की शान बब्बर शेर पृथ्वी ने शनिवार को आखिरी सांस ली। इसकी चिकित्सा 14 जून की शाम से चल रही है। 17 साल के बुजुर्ग पृथ्वी खाना-पीना छोड़ दिया था। वह उठ भी नहीं पा रहा था। चिड़ियाघर की निदेशक आदिति शर्मा ने बताया कि पिछले लगातार 3 सप्ताह से कीपर तथा प्राणि उद्यान के वन्य जीव चिकित्सक निरन्तर इसकी चिकित्सा एवं देखभाल कर रहे थे साथ ही अन्य विशेषज्ञों से परामर्श भी लिया जा रहा था।
यह बब्बर शेर वर्ष 2015 में विलासपुर प्राणि उद्यान छत्तीसगढ़ से लखनऊ प्राणि उद्यान लाया गया था। पृथ्वी और इसकी संगिनी मादा बब्बर शेरनी वसुन्धरा ने वर्ष 2015 में ही चार बच्चों को जन्म दिया था। पृथ्वी बब्बर शेर उम्र की दृष्टि से बुजुर्ग हो चुका था। कई सप्ताह से स्वास्थ्य की स्थिति चिन्ताजनक बनी हुई थी। अभी 3 मादा बब्बर शेरनियां है। मृत्यु के बाद 05 पशु चिकित्साधिकारियों के पैनल ने इस बब्बर शेर का पोस्टमार्टम किया, जिसमें मौत का कारण बब्बर शेर का बुजुर्ग होना बताया गया।
पृथ्वी की बेटियां निराश
पृथ्वी की दोनों बेटियां परेशान हैं। बाड़े में दोनों ही अपने पिता को ढूंढते हुए नजर आती हैं। वहीं वसुंधरा भी परेशान है। हालांकि, पृथ्वी के परिवार को किसी भी तरह का डिप्रेशन न हो इसलिए लखनऊ चिड़ियाघर के कीपर और डॉक्टर समय-समय पर वसुंधरा और दो बेटियां शीना और नाज की मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
बब्बर शेर का एक ही परिवार था जो टूटा
लखनऊ चिड़ियाघर के पशु डॉक्टर अशोक कश्यप ने बताया कि पूरे चिड़ियाघर में केवल एक बब्बर शेर पृथ्वी का ही परिवार है। बब्बर शेरों का परिवार दूसरा चिड़ियाघर में कोई भी नहीं है। यही वजह है कि लखनऊ चिड़ियाघर के दर्शकों को सबसे अधिक यह परिवार पसंद आता है।
... और सूने होते गए बाड़े
-करीब डेढ़ साल पहले 14 वर्ष की हिप्पो मुन्नी की मौत हो गई थी।
-उसके दो महीने के भीतर दो साल के बेटे बादल की भी मौत हो गई।
-2018 में गैंडे लोहित ने दम तोड़ दिया था।
-2019 में प्राणि उद्यान के हीरो हुक्कू कालू बन्दर गुजर गया।
-2015 में मादा जिराफ सुजाता के बच्चे की मौत जन्म के दो घंटे के भीतर हो गई थी।
-इसके अलावा बाघिन कजरी, तेंदुआ आदि भी समय समय पर जू से विदा ले चले।