लखनऊ का ऐतिहासिक जू अब अवध के अंतिम नवाब वाजिद अली शाह प्राणि उद्यान के नाम से पहचाना जाएगा। मंगलवार को यूपी कैबिनेट की बैठक में इस बात पर मोहर लगी। लखनऊ के साथ लखनऊ-कानपुर रोड में पड़ने वाले नवाबगंज पक्षी बिहार का नाम भी बदल गया है।
चन्द्रशेखर आजाद के नाम पर नवाबगंज पक्षी विहार का नाम परिवर्तित कर ‘शहीद चन्द्रशेखर आजाद पक्षी विहार, नवाबगंज’ उन्नाव रखने का निर्णय लिया है।
जिनके नाम पर लखनऊ के चिड़ियाघर का नाम रखा गया है उनके बारे में भी कुछ जान लीजिए। नवाब वाजिद अली शाह को अंग्रेजी हुकूमत के दौरान 11 फरवरी, 1856 को अवध छोड़कर कोलकाता जाना पड़ा था।
नवाब वाजिद अली शाह कला-संस्कृति एवं पशुप्रेम के अलावा लेखन के भी शौकीन थे। उनके वंशज आसिफ अली मिर्जा बताते हैं कि वाजिद अली शाह ने सौ से अधिक किताबें लिखीं, जो अलग-अलग विषयों पर आधारित थीं। इनमें से दो किताबें जानवरों पर थीं। पहली जानवरों की शारीरिक संरचना(एनॉटमी) पर और दूसरी मछलियों पर, जो कि उस काल में समृद्घ का प्रतीक मानी जाती थी।
लखनऊ से कोलकाता जाने के बाद उन्होंने देश का पहला ओपेन जू खोला था। लखनऊ जू का नाम नवाब वाजिद अली शाह के नाम पर किए जाने के निर्णय पर कोलकाता में रह रहे उनकेवंशज आसिफ अली मिर्जा ने खुशी जताई है।