लखनऊ में प्राणि उद्यान में सोमवार को मादा दरियाई घोड़ा (हिप्पो ) इंदिरा ने दो कर्मचारियों पर हमला कर दिया। कीपर ने किसी तरह जान बचाई, जबकि सफाईकर्मी सूरज को हिप्पो ने पटककर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया। सूरज को सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं घटना से आक्रोशित सूरज के परिवारीजनों ने देर शाम प्राणि उद्यान पहुंचकर हंगामा किया।
ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के बरौरा के रहने वाले सूरज करीब 12 साल से चिड़ियाघर में संविदा पर सफाईकर्मी तैनात थे। सूरज को 5500 रुपये प्रति माह मिलते थे। सोमवार को प्राणि उद्यान बंद था। सफाईकर्मी सूरज व कीपर राजू सुबह करीब 10:30 बजे इंदिरा के बाड़े में भोजन व सफाई की व्यवस्था के लिए गए थे। इसी दौरान इंदिरा ने उनपर हमला कर दिया।
घटना की जानकारी मिलने पर प्राणि उद्यान के अफसर मौके पर पहुंचे। बाड़े से दोनों को बाहर निकाला गया। सुबह करीब 11 बजे सूरज को गंभीर हालत में सिविल अस्पताल ले जाया गया। इमरजेंसी में मौजूद डॉ. राहुल ने जांच-पड़ताल करके उनको मृत घोषित कर दिया। चिड़ियाघर की निदेशक अदिति शर्मा समेत अन्य अधिकारी भी सूचना पर सिविल अस्पताल पहुंचे। मृतक की पत्नी लता व बेटा-बेटी हैं। घटना के बाद परिजनों को रो-रोकर बुरा हाल है।
सरकारी नौकरी की मांग को लेकर किया हंगामा
सूरज के चाचा व अन्य परिवारीजनों ने सोमवार देर शाम प्राणि उद्यान पहुंचकर जमकर हंगामा किया। परिवारीजनों ने सूरज को बाड़े में धक्का दिए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने सूरज की पत्नी काे सरकारी नौकरी दिए जाने की भी मांग की। प्राणि उद्यान प्रशासन ने पीड़ित परिवार को पचास हजार रुपये की आर्थिक मदद दी।
आंखों देखी : राजू बोले-इंदिरा के तेवर देख मैं कूदकर सुरक्षा दीवार पर चढ़ गया, राजू नहीं चढ़ पाए
कीपर राजू ने बताया, सूरज ने बाड़े की सफाई कर ही रहे थे कि इंदिरा ने हमला कर दिया। उसके तेवर को देखते ही मैं हमले से बचाव के लिए बनाई गई दीवार पर कूदकर चढ़ गया। मैं दीवार पर ही लेट गया। पर, सूरज दीवार पर ही लटके रह गए। इससे इंदिरा को हमले का मौका मिल गया। इंदिरा ने सूरज को दो बार पटकने के बाद छोड़ा। राजू बताते हैं कि हर हिंसक जानवर के बाड़े में हमले से बचाव के लिए ऐसी दीवार बनाई गई है।
बगैर किसी सुरक्षा के बाड़े में जाने देने पर सवाल
इंदिरा को 4 दिसंबर को ही कानपुर चिड़ियाघर से लखनऊ लाया गया था। बिना किसी सुरक्षा के कर्मचारियों को उसके बाड़े में कर्मचारियों को जाने देने पर सवाल उठ रहे हैं। इसके पीछे लापरवाही भी सामने आ रही है।
पहले भी कई घटनाएं हो चुकी थी लखनऊ जू में
प्राणि उद्यान के डॉक्टर आरके दास वर्ष 1995 में खूंखार गेंडे लोहित का इलाज करते थे। लोहित ने डॉक्टर को बाड़े में दबाकर मार डाला था। इस घटना के कुछ ही समय बाद एक युवक शाम को पतंग लूटने के बहाने बाड़े में कूद गया था। गेंडे लोहित ने उसे भी पटककर बाड़े में मार डाला था। सफाईकर्मी अकेले कभी बाड़े में नहीं जाता है। प्रोटोकाल के तहत कीपर भी अंदर संग जाता है। कीपर को ही पता रहता है कि जानवर के बारे में पूरी जानकारी रखता है। बताया यह एक दुखद घटना हुई है। प्राणि उद्यान प्रशासन पीड़ित परिवार संग खड़ा है।
- अदिति शर्मा, निदेशक, प्राणि उद्यान