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Lucknow News: आशा भोसले के गीतों में हमेशा महकता रहेगा लखनऊ

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मुंबई में वर्ष 2008 में भोजपुरी फिल्म के गीत की रिकॉर्डिंग के दौरान आशा भोसले के साथ संगीतकार क
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अभिषेक सहज
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लखनऊ। हजारों फिल्मी और गैर फिल्मी गीतों को अपनी सुमधुर आवाज से यादगार बनाने वाली मशहूर पार्श्व गायिका आशा भाेसले के निधन की खबर ने देशभर में उनके प्रशंसकों के साथ ही लखनऊवासियों को भी उदास कर दिया। वे 1999 में लखनऊ आई थीं और उस दौरान उन्हें अवध सम्मान से नवाजा गया था।

आशा भोसले के गीतों में लखनऊ और यहां की तहजीब का जिक्र भी मिलता है जो उन्हें हमेशा लखनऊ से जोड़े रही। वर्ष 1972 में फिल्म बाजीगर के लिए उस जमाने का लोकप्रिय गीत ‘पनवाड़ी हूं मैं लखनऊ की...’ को आशा भोसले ने अपनी आवाज से संवारा था। इस गीत मेंं लखनऊ की संस्कृति को खूबसूरती के साथ पिरोया गया। वहीं 1978 में आई फिल्म सरकारी मेहमान का एक गीत ‘लखनऊ छूटा तो दिल्ली ने लूटा...’ काफी लोकप्रिय हुआ जिसे आशा भोसले ने ही अपने अलहदा अंदाज में गाया था। आशा भोसले के साथ लखनऊ और लखनवियों से जुड़ी ढेर सारी यादें भी हैं जिनमें से कुछ को हम आप तक पहुंचा रहे हैं :
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केवल कुमार ने आशा भोसले से गवाया था भोजपुरी गीत
फोटो-

यशभारती समेत कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजे जा चुके लखनऊ के मशहूर संगीतकार और गायक केवल कुमार ने कहा कि वर्ष 2008 में वे एक भोजपुरी फिल्म ‘नेहिया सनेहिया’ में संगीत दे रहे थे और उन्होंने डायरेक्टर से शर्त रखी थी कि वे इसमें आशा भोसले से जरूर गाना गवाएंगे। उनकी शर्त डायरेक्टर ने मान ली और एक गीत उन्होंने अपनी आवाज में रिकॉर्ड कर आशा भोसले तक पहुंचा दिया। रिकॉर्डिंग के दिन आशा जी स्टूडियो पहुंचीं तो उन्हाेंने केवल कुमार से कहा कि आपकी आवाज तो बहुत अच्छी है, आपको तो फिल्मों में प्लेबैक सिंगर होना चाहिए था। वह गीत उन्होंने भोजपुरी में बहुत बेहतरीन गाया। रिकॉर्डिंग के बाद जब लोगों ने उनसे सवाल किया कि इतने लंबे अंतराल के बाद आप भोजपुरी में गाने को कैसे राजी हो गईं तो उन्होंने कहा कि संगीतकार चित्रगुप्त के बाद केवल कुमार ही मुझसे भोजपुरी में गाना करा सकते थे, इसलिए मैंने गाया। केवल कुमार कहते हैं कि आशा जी का दुनिया से जाना संगीत जगत की अपूर्णनीय क्षति है, उनके जैसी आवाज करोड़ों गायकों में से किसी एक की होती है।

1999 में लखनऊ में दिया गया था अवध सम्मान
फोटो- जफर नबी की

जफर नबी ने 1999 में लखनऊ के हजरत महल पार्क में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था जिसमें आशा भोसले आई थीं। जफर नबी ने बताया कि उन्हें अवध सम्मान से नवाजा गया था। होटल ताज में उनके लिए डिनर रखा गया था। उन्होंने बताया कि अगले दिन मेरे और मेरी पत्नी फरीदा यास्मीन के साथ वे टुंडे के कवाब खाने गईं जहां उन्होंने कवाब की खूब तारीफ की। जफर नबी बताते हैं कि आशा जी बेहतरीन सिंगर होने के साथ ही नेकदिल इंसान थीं जो सभी को सम्मान देती थीं।

दो गाने न गा पाने का उन्हें ताउम्र रहा मलाल
फोटो- विवेक

प्रोड्यूसर डायरेक्टर विवेक शुक्ला ने बताया कि 1999 में जब आशा जी लखनऊ आई थीं तो मैंने उनका साक्षात्कार लिया था। उन्होंने मुझसे एक बड़ी अहम बात कही थी कि मुझे अपने जीवन में दो गीत न गा पाने का हमेशा मलाल रहेगा। ये दोनों गीत पहले उन्हें ही गाने थे। पहला गीत था ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी... और दूसरा गीत था वक्त ने किया ये हसीं सितम हम रहे न हम तुम रहे न तुम...।
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चित्र बनाकर दी भावभीनी श्रद्धांजलि
फोटो-

लखनऊ के युवा चित्रकार अश्वनी कुमार प्रजापति ने अपने चित्रों के मध्यम से जल रंग में स्वर कोकिला आशा भोसले का चित्र बनाकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। अश्वनी ने कहा कि आशा भोसले के स्वर ने न जाने कितने दिलों को छुआ, आज जब वे संसार से विदा ले चुकी हैं, तब उनकी यादें और उनके गीत हमारे बीच सदा जीवित रहेंगे। मैंने अपने चित्रों के जरिये उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
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