मृतक शोएब व उसके परिजन।
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दोपहर होते-होते जनाजा कब्रिस्तान ले जाने की तैयारियां शुरू हुई। दोपहर 12.30 बजे शोएब का चेहरा आखिरी बार उनकी बुजुर्ग मां आबदा, पत्नी फौजिया और अन्य महिलाओं को दिखाया गया। कफन में लिपटे इकलौते जवान बेटे का जनाजा देखते ही आबदा फूट-फूट कर रोने लगीं और बेसुध हो गई। फौजिया ने जैसे ही पति शोएब का चेहरा देखा वह दहाड़े मार कर चीख पड़ी और बेहोश हो गई। वहां मौजूद महिलाओं ने दोनों को संभाला।
शोएब के दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी बुशरा छह साल की है और छोटी बेटी इकरा ढाई साल की है। दोनों बेटियां पिता के जनाजे के पास मौजूद तो थीं, पर दोनों को उनकी मौत का अंदाजा नहीं था। बुशरा को घरवालों ने बताया कि अब उसके पापा इस दुनिया में नहीं रहे। यह बात सुनते ही वह फूट-फूट कर रोने लगी। बुशरा की आंख से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। उसको भी एहसास था कि अब उसके पापा कभी लौट कर नहीं आएंगे। वहीं मासूम इकरा इन सारी बातों से अनजान थी। लोगों की गोद में मौजूद इकरा घर में जमा भीड़ देख कर हैरान थी।
दोपहर 12.30 बजे शोएब का जनाजा उनके घर से निकला तो कोहराम मच गया। घर के बाहर मौजूद लोगों ने जनाजे को कंधा दिया। वहां मौजूद हर किसी की आंख नम थी। लोग शोएब की मौत पर यकीन नहीं कर पा रहे थे। जनाजा घर से निकल कर ऐशबाग कब्रिस्तान पहुंचा। कब्रिस्तान में पहले से काफी लोग मौजूद थे, जो शोएब के घर नहीं पहुंच सके। कब्रिस्तान में जनाजे की नमाज अदा की और शोेएब को सुपुर्द-ए- खाक कर दिया गया।
शोएब परिवार में कमाने वाला इकलौता था। पिता की 20 साल पहले मौत हो चुकी है। बहन शहला शादीशुदा हैं। अब शोएब की मौत के बाद परिवार का खर्च चलाना मुश्किल है। उनकी बुजुर्ग मां आबदा ने बहू फौजिया के लिए सरकारी नौकरी की मांग की है, ताकि परिवार का खर्च चल सके और शोएब की बेटियों की पढ़ाई कराई जा सके। इसी के साथ मां व पत्नी ने सीएम योगी व सरकार से मांझे पर पूरी तरह से रोक लगाने और शोएब की मौत के जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी की है।