यूपी के अंबेडकरनगर में बिजली बिल राहत योजना का दूसरा चरण बृहस्पतिवार को समाप्त हो गया। लेकिन, उपभोक्ताओं में कोई खास उत्साह नहीं दिखा। अंतिम दिन सभी बिजली घरों पर लगे कैंप में ज्यादातर उपभोक्ता नियमित बिल जमा करने वाले ही नजर आए।
अकबरपुर बिजली घर पर तीन काउंटर के साथ ही दो कैंपों पर सुबह 10.30 बजे सन्नाटा पसरा रहा। 15 मिनट बाद कई उपभोक्ता पहुंचे। शास्त्रीनगर के दिनेश कुमार ने बताया कि एक किलोवाट का घरेलू कनेक्शन का फरवरी माह में 912 रुपये का बिल जमा करने आए हैं।
योजना बहुत अच्छी है- उपभोक्ता
अकबरपुर के धर्मराज यादव ने बताया कि उनका एक लाख 11 हजार 176 रुपये का बिल बकाया था। योजना के तहत सरचार्ज व मूलधन में मिली छूट के बाद 34 हजार रुपये जमा कर बकाए से छुटकारा पा गए। गरीबों व मध्यम वर्ग के लिए यह योजना बहुत अच्छी है। इसका सभी लाभ लें।
शाम 04.00 बजे तक अकबरपुर में 10 लाख रुपये का बकाया जमा हुआ। जबकि, अकबरपुर, जलालपुर, टांडा और आलापुर के एक लाख 82 हजार 369 उपभोक्ताओं पर 391.04 करोड़ रुपये का मूलधन और 375.58 करोड़ रुपये का ब्याज मिलाकर कुल 766.62 करोड़ रुपये की बकाएदारी है। इसके सापेक्ष अब तक केवल 74 करोड़ रुपये की ही वसूली हो सकी है।
अंतिम चरण में विभाग ने झोंकी ताकत
योजना का अंतिम चरण शुक्रवार से शुरू हो रहा है। करीब एक माह तक यह अभियान चलेगा। विभाग के जानकारों के अनुसार, इसके बाद छूट समाप्त कर दी जाएगी। इस प्रकार की छूट पहली बार दी गई है। ऐसे में यदि समय रहते उपभोक्ता इसका लाभ लेकर अपना बकाया जमा करा दें। अन्यथा की दशा में मार्च में वृहद अभियान के दौरान बकाएदारों को बक्शा नहीं जाएगा।
जेई व एसडीओ से मांगा जा चुका है स्पष्टीकरण, अब होगी कार्रवाई
अकबरपुर डिवीजन में अब तक 21.31 करोड़, अकबरपुर में 26.04 करोड़, जलालपुर में 13.25 करोड़ और टांडा डिवीजन में 12.97 करोड़ रुपये का बकाया योजना के तहत जमा करा सके हैं। कम वसूली को लेकर बीते माह अधीक्षण अभियंता ने सभी जेई व एसडीओ के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किया था। अब अंतिम चेतावनी के बाद सीधे कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
अधीक्षक अभियंता रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि चारों डिवीजन ने अब तक 30 प्रतिशत बकाया जमा करा सके हैं। फरवरी माह में वसूली के लिए कैंपों की संख्या बढ़ाई गई है। सभी को इस बारे में जानकारी दे दी गई है। बकाया वसूली में लापरवाही बरतने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।