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10 फरवरी से भरे जाएंगे बीएड फॉर्म, यहां देखें

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सूबे के बीएड कॉलेजों में सत्र 2016-18 में प्रवेश के लिए होने वाली राज्य स्तरीय संयुक्त प्रवेश परीक्षा के ऑनलाइन आवेदन फॉर्म 10 फरवरी से भरे जाएंगे। वहीं प्रवेश परीक्षा का आयोजन 22 अप्रैल को होगा।
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लगातार दूसरे साल इस परीक्षा की जिम्मेदारी लखनऊ विश्वविद्यालय को सौंपी गई है। लविवि के कुलसचिव डॉ. एकेमिश्रा ने बताया कि इस संबंध में शासन की ओर से विश्वविद्यालय को पत्र भेज दिया गया है।

उसके आधार पर कुछ महत्वपूर्ण तिथियों पर निर्णय लिया गया है। ऑनलाइन आवेदन फॉर्म 10 मार्च तक भरे जा सकेंगे। जनरल व ओबीसी के लिए आवेदन फॉर्म का शुल्क एक हजार रुपये और एससी व एसटी केलिए 550 रुपये शुल्क होगा।
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इस तरह की जा रही हैं तैयारियां

कुलसचिव डॉ. एके मिश्रा ने बताया कि एक-दो दिन के अंदर ही बैठक का आयोजन कर परीक्षा के लिए समन्वयक और उनकी टीम का निर्धारण किया जाएगा। वहीं शासनादेश आने के साथ ही विवि ने यूपी बीएड की वेबसाइट को अपडेट और निर्धारित तिथियों पर शुरू करने के लिए वार्ता भी शुरू कर दी है।

2015 में आयोजित प्रवेश की बात करें तो प्रदेश के 1825 कॉलेजों की करीब 1,81,370 सीटों के लिए प्रक्रिया हुई थी। हालांकि काउंसलिंग के बाद इसमें एक लाख से अधिक सीटें रिक्त रह गई थीं। बीएड कॉलेजों और उनकी सीटों की संख्या में इस बार भी परिवर्तन होगा।

इसके अलावा 2015 की परीक्षा की बात करें तो पहली बार बीटेक और बीई वालों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया गया था। इसके अलावा ट्रांसजेंडर्स का कॉलम भी फॉर्म में शामिल हुआ था।

सुरक्षा की दृष्टि से लखनऊ विवि ने बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की व्यवस्था लागू की थी जिससे परीक्षा देने और काउंसलिंग में आने वाले अभ्यर्थी एक ही हों। किसी तरह का फर्जीवाड़ा न हो सके।
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एनआईसी से फॉर्म भराना ही होगा चैलेंज

एक साल के दौरान एनआईसी ने अपनी नियमावली में कुछ बदलाव किए हैं। विवि सूत्रों की मानें तो इसकी वजह से इस साल एनआईसी के माध्यम से प्रवेश प्रक्रिया कराना आसान नहीं होगा।

असल में एनआईसी के ऊपर कई शिक्षण संस्थानों के फॉर्म भरवाने की जिम्मेदारी रहती है। विवि सूत्रों के अनुसार इसे देखते हुए अब एनआईसी ने यह तय कर लिया है कि वह सभी संस्थानों के लिए एक कॉमन फॉर्म का फॉर्मेट तैयार कर देगी। जबकि एलयू को बीएड का फॉर्म भरवाने के लिए अलग प्रोफोर्मा की आवश्यकता होती है। यह सुप्रीमकोर्ट के निर्देशानुसार तैयार है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इन चीजों को लेकर जब एनआईसी से बात हुई तो कहा गया कि विवि एनआईसी के दिल्ली हेल्डक्वार्टर से संपर्क करे।

यदि बात नहीं बन पाती है तो संभव है कि विवि को किसी अन्य एजेंसी की राह देखनी पड़ जाए। फिलहाल अधिकारी इस बारे में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
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