एलयू प्रशासन और छात्रों में टकराव कम होता नहीं दिख रहा है। परिसर में आए दिन हो रहे उपद्रव और बवाल को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन सख्त कदम उठाने जा रहा है। इसके लिए प्रशासन उपद्रवी छात्रों को परिसर से बाहर करने के अलावा कॉलेजों में दाखिला नहीं देने के निर्देश भी जारी करेगा।
साथ ही उपद्रव, हंगामा और बवाल के सीसीटीवी फुटेज विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड की जाएंगी, ताकि आम लोगों को पता चले कि इन फुटेज में कौन-कौन शामिल है। विश्वविद्यालय प्रशासन की तमाम कोशिशों और कवायद के बाद भी सेंट्रल मेस नहीं चल पा रही है।
पहले मेस की बायोमीट्रिक मशीन तोड़ी गई, फिर खराब खाने को लेकर हंगामा हुआ। विश्वविद्यालय ने सुरक्षा के लिहाज से बाउंसर तक तैनात किए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। मंगलवार को तोड़फोड़ के बाद अंतत: बुधवार को सेंट्रल मेस बंद कर दी गई। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उपद्रव और बवाल करने के आरोप में 18 छात्रों के खिलाफ कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करा दी।
बार-बार की घटनाओं से सबक लेते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ऐसे छात्रों को अपने यहां डिबार करने के साथ ही संबद्ध कॉलेजों में इन्हें दाखिला न मिले, इसके दिशा-निर्देश जारी करेगा। विवि प्रशासन का कहना है कि हर बवाल के बाद छात्र कहते हैं कि उन्होंने नहीं किया। इसलिए ऐसी घटनाओं की फुटेज वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी ताकि सच्चाई लोगों के सामने आ सके।
सेंट्रल मेस बंद होने से छात्रों को खाने के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है। कुछ छात्र बाहर खा रहे हैं तो कुछ इधर-उधर से भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को परिसर में ही काफी छात्र परेशान दिखे। उनमें से कुछ ने अपने सीनियर्स से पूछा, सर मेस कब चलेगी? इस पर सीनियर्स ने जवाब दिया कि अभी एक-दो दिन परेशानी उठानी पड़ेगी। देखो, शायद ही चले। वहीं, कुछ छात्र अधिकारियों से भी जानकारी लेते दिखे।
सीएम-डिप्टी सीएम को किए ट्वीट
डेमो
छात्रनेता पूजा शुक्ला ने ट्वीट कर इस मुद्दे को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा को जानकारी दी है। उन्होंने कहा है कि ‘लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, संज्ञान ले बेहद संवेदनशील मुद्दा है।’
छात्रसंघ बहाली के लिए चार दिनों से धरने पर बैठे छात्रों में सेंट्रल मेस मामले में एफआईआर दर्ज कराने से नाराजगी है। छात्रों ने बृहस्पतिवार को कुलपति प्रो. एसपी सिंह से मुलाकात कर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन बिना किसी आधार के उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज करा देता है, जबकि वे घटना स्थल पर नहीं रहते हैं।
यह विश्वविद्यालय हमारा है और हम इसकी संपत्ति को नुकसान क्यों पहुंचाएंगे? छात्रों ने कहा, कुलानुशासक व्यक्तिगत द्वेष से ऐसा कर रहे हैं। छात्रों ने चेतावनी दी कि जल्द उनपर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए जाते तो वे परिसर में ही आमरण अनशन करने के लिए बाध्य होंगे।
छात्रों ने मांग रखी कि सेंट्रल मेस संचालक ने जो आरोप लगाए हैं, उनकी भी जांच कराई जाए। छात्रों ने बताया कि कुलपति ने उनसे कहा है कि अगर गलत एफआईआर कराई गई है तो उसे दिखवाया जाएगा। उन्होंने परिसर के अच्छे कार्यों में छात्रों से सहयोग मांगा। वहीं, बृहस्पतिवार को भारी बारिश के बीच भी छात्रसंघ बहाली के लिए छात्र धरने पर बैठे रहे।
उपद्रव, बवाल और हंगामे में शामिल छात्रों को विश्वविद्यालय डिबार करेगा। साथ ही विवि से संबद्ध कॉलेजों में भी इन्हें दाखिला न मिले, इसके दिशा-निर्देश कॉलेजों को जारी किए जाएंगे। घटना में शामिल छात्रों की हकीकत सभी जान सकें, इसलिए विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर उपद्रव और बवाल की सीसीटीवी फुटेज भी अपलोड की जाएंगी। - प्रो. एसपी सिंह, कुलपति