लखनऊ विश्वविद्यालय में धरना देते शिक्षक
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लखनऊ विश्वविद्यालय में फर्जी मार्क्सशीट मामले व खाते से जालसाजी कर निकाले गए पैसे आदि पर कार्रवाई की मांगों को लेकर गुरुवार को शिक्षकों ने धरना दिया।
आपको बता दें कि लखनऊ विश्वविद्यालय बैंक खाते से 1.09 करोड़ रुपये निकाले जाने के बावजूद वहां का प्रशासन गंभीर नहीं दिखाई दे रहा है। विवि प्रशासन ने एक बार फिर से सिर्फ खानापूर्ति करने के लिए समिति बना दी है। इस समिति को सिर्फ लविवि के लेखा विभाग की समीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है।
लेखा विभाग की इस मामले में क्या लापरवाही रही? समिति को इस सवाल का जवाब ही नहीं तलाशना है। लविवि ने फर्जी अंकपत्र मामला सामने आने के बाद भी इसी तरह की समिति बनाई थी। वो बात और है कि उसकी रिपोर्ट चार महीने बाद भी नहीं आ सकी है।
लविवि प्रशासन ने कोषागार से सेवानिवृत्त हुए अतिरिक्त निदेशक नरेंद्र भूषण, स्टेट बैंक मुख्य शाखा के मुख्य सहायक केके सिंह और लविवि वित्त अधिकारी संजय श्रीवास्तव को शामिल करते हुए तीन सदस्यीय समिति बनाई है। इस समिति को छह बिंदुओं पर जांच पूरी करके सात दिनों में रिपोर्ट देनी है। विवि पूरी तरह से लेखा विभाग को बचाने में लगा हुआ है।