पीएचडी दाखिले में ईडब्ल्यूएस कोटे पर हुई फजीहत से सबक लेते हुए लखनऊ विवि ने इस बार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से मार्गदर्शन मांगा है।
लविवि ने पिछली बार दाखिले में ईडब्ल्यूएस कोटे का लाभ दिया था, लेकिन उसको लेकर काफी विवाद हो गया था।
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि उनका हक मारकर आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को कोटे का लाभ दे दिया गया। इस बार वही स्थिति न हो इसलिए लविवि ने पहले ही यूजीसी को पत्र लिख दिया है।
यूजीसी के नियमों के अनुसार, पीएचडी में प्रोफेसर के अधीन अधिकतम आठ, एसोसिएट प्रोफेसर के अधीन छह और असिस्टेंट प्रोफेसर के अधीन एक समय में अधिकतम चार पीएचडी स्कॉलर ही हो सकते हैं।
इसमें किसी प्रकार की बढ़ोतरी नहीं की जा सकती है। सरकार ने दाखिले में गरीब सवर्ण को लाभ देने के लिए 10 फीसदी कोटा निर्धारित किया है।
इसकी शर्त है कि अन्य वर्ग के हित को प्रभावित किए बिना इसका लाभ दिया जाएगा। इसके लिए निर्धारित सीट के मुकाबले कुछ सीट बढ़ाने का विकल्प दिया गया।
पीएचडी में सीट की संख्या शिक्षक के हिसाब से तय होती है। इसलिए उसमें सीट नहीं बढ़ाई जा सकती। लविवि ने विज्ञापन में ईडब्ल्यूएस कोटे की सीट की जानकारी नहीं दी थी, लेकिन बाद में कोटा देने का फैसला किया।
इससे पहले अन्य पाठ्यक्रम में ली जा चुकी है राय
लविवि ने एलएलबी, बीएड में सीट बढ़ाने को बीसीआई, एनसीटीई को पत्र भेज मार्गदर्शन मांगा था। पत्र आने पर तय संख्या में सीटें बढ़ाकर 10 फीसदी ईडब्ल्यूएस कोटे का लाभ दिया। इससे वहां एससी और ओबीसी अभ्यर्थियों का हित प्रभावित नहीं हुआ। पीएचडी के मामले में लविवि ने यूजीसी को पत्र भेजकर राय लेने के बजाय अपने हिसाब से बिना सीट बढ़ाए कोटे का लाभ दे दिया।
निर्देश का होगा पालन
लविवि के कुलपति आलोक कुमार राय ने बताया कि ईडब्ल्यूएस कोटे पर कोई विवाद न हो इसलिए यूजीसी को पत्र भेजकर मार्गदर्शन मांगा गया है। जैसा निर्देश होगा उसका पालन किया जाएगा।