रविशंकर गुप्ता
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में शिक्षकों के प्रमोशन पर सख्ती बढ़ा दी गई है। अब करियर एडवांसमेंट स्कीम (कैस) के तहत होने वाली पदोन्नति से पहले सतर्कता अधिकारी की जांच रिपोर्ट अनिवार्य कर दी गई है। रिपोर्ट ‘ओके’ होने पर ही शिक्षकों को प्रमोशन मिल सकेगा। कुलपति के निर्देश पर विश्वविद्यालय की कुलसचिव भावना मिश्रा को सतर्कता अधिकारी नियुक्त किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत यदि किसी शिक्षक के खिलाफ जांच लंबित है या पूर्व में किसी प्रकार की कार्रवाई हुई है, तो प्रमोशन की प्रक्रिया आसान नहीं होगी। प्रमोशन से पहले सतर्कता अधिकारी की ओर से सभी मामलों की जांच की जाएगी। कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। (संवाद)
शिकायत और मुकदमों की होगी जांच
विश्वविद्यालय में किसी भी शिक्षक के खिलाफ दर्ज शिकायत, विभागीय जांच या मुकदमे की स्थिति का परीक्षण सतर्कता जांच में किया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही प्रमोशन पर निर्णय लिया जाएगा।
क्लास लेने का रिकॉर्ड भी होगा शामिल
पदोन्नति से पहले यह भी देखा जाएगा कि शिक्षक ने निर्धारित अवधि में कितने घंटे अध्यापन कार्य किया है। इस संबंध में तैयार रिपोर्ट सतर्कता अधिकारी को सौंपी जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर विद्यार्थियों से फीडबैक भी लिया जा सकेगा।
2016 के शासनादेश पर अमल
राज्य सरकार का 2016 का शासनादेश सभी विश्वविद्यालयों में लागू होना था, लेकिन किसी कारणवश लखनऊ विश्वविद्यालय में इसे अब तक लागू नहीं किया गया था। अब शासनादेश के अनुरूप नई व्यवस्था लागू कर दी गई है।
कुलपति प्रो. जेपी सैनी के अनुसार विश्वविद्यालय में शिक्षकों की प्रमोशन प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से पूरी की जा सके, इसके लिए यह व्यवस्था लागू की गई है।