लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में न सिर्फ छात्रावासों की कमी है बल्कि यहां मूलभूत सुविधाओं तक के लिए विद्यार्थी तरस रहे हैं। गुणवत्ताविहीन भोजन से लेकर दूषित पानी तक की शिकायतों के लिए छात्र-छात्राएं आए दिन धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलपति स्वयं इन छात्रावासों का निरीक्षण कर रहे हैं जिससे थोड़ा सुधार भी दिख रहा है लेकिन समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं।
बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने सुधारों की हकीकत परखने के लिए हबीबुल्लाह छात्रावास पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और छात्रों से बात की। इस दौरान जांच करने पर पता चला कि यहां जिस पानी से भोजन पकाया जा रहा है, उसका टीडीएस 653 तक पहुंच चुका है। यहां लगे अन्य वाटर कूलर से मिलने वाले पानी का भी हाल बुरा है जिससे छात्र बाजार से मिनरल वाटर की बोतलें खरीदने को मजबूर हैं। एक अन्य वाटर कूलर के पानी को चेक किया गया तो उसका टीडीएस 480 निकला। छात्रों ने बताया कि हॉस्टल में कई वाटर कूलर लगे हैं लेकिन किसी का भी पानी पीने लायक नहीं है और वे बाजार से मिनरल वाटर खरीदकर पी रहे हैं। कहा, कई बार शिकायतें की गईं लेकिन आरओ में सुधार के बाद एक सप्ताह बाद फिर से वही स्थिति हो जाती है। छात्रोें ने बताया कि पहले यहां काफी खराब गुणवत्ता का भोजन मिल रहा था, विरोध प्रदर्शन के बाद उसमें अपेक्षाकृत थोड़ा सुधार आया है।
अधिक टीडीएस होने पर नुकसान
बलरामपुर अस्पताल के डॉ. एमएच उस्मानी ने बताया के अनुसार, अधिक टीडीएस (टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स) से पाचन तंत्र की समस्याएं हो सकती हैं। अधिक मात्रा में घुले खनिज और लवण (जैसे मैग्नीशियम और सल्फेट) दस्त, पेट में ऐंठन या अपच जैसी गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याएं पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक उच्च टीडीएस वाला पानी पीने से किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे पथरी हो सकती है। 500 पार्ट्स प्रति मिलियन (पीपीएम) से अधिक टीडीएस वाले पानी का स्वाद नमकीन, कड़वा या धातु जैसा हो सकता है जिससे लोग कम पानी पीते हैं और डिहाइड्रेशन का जोखिम रहता है। बाल रूखे और बेजान हो सकते हैं तथा त्वचा में सूखापन या जलन महसूस हो सकती है।
वायरल हुई खबर तो पूरे अमले के साथ निरीक्षण करने पहुंचे कुलपति
हबीबुल्लाह छात्रावास की हकीकत बयां करती वीडियो स्टोरी बृहस्पतिवार शाम 4:35 बजे अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफाॅर्म पर जैसे ही चली, थोड़ी देर बाद ही लखनऊ विवि प्रशासन हरकत में आ गया। मामला कुलपति तक पहुंचा तो वे आनन-फानन औचक निरीक्षण करने शाम को हबीबुल्लाह छात्रावास पहुंच गए। वहां उनके सामने छात्रों ने पेयजल से संबंधित समस्याएं रखीं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने मौके पर ही निर्माण विभाग के अभियंताओं को पानी का टीडीएस तत्काल जांचने के निर्देश दिए। निर्देशित किया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर तुरंत सुधार किया जाए। इसके बाद कुलपति बगल में ही स्थित महमूदाबाद हॉस्टल भी पहुंचे और छात्रों से बातचीत की। दोनों ही हॉस्टल में कुलपति ने छात्राें से संवाद किया और छात्रावासों में कमरों, मेस, रसोई, डाइनिंग हॉल, कॉमन रूम और परिसर में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं निरीक्षण किया। इससे पहले उन्होंने लावण्या हॉस्टल में भी मेस व रसोई में रखी खाद्य सामग्री की शुद्धता, दाल, चावल व मसालों के पैकेट की गुणवत्ता और भंडारण का परीक्षण किया था।
प्रवक्ता प्रो. मुकुल श्रीवास्तव के अनुसार, हबीबुल्लाह छात्रावास में छात्रों की पेयजल संबंधी समस्या पर कुलपति ने तत्काल प्रभाव से पानी का टीडीएस जांच कराने और तकनीकी समस्या का अविलंब समाधान करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। निर्माण विभाग, प्रॉक्टोरियल बोर्ड और डीएसडब्ल्यू की पूरी टीम निरंतर व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग कर रही है।
छात्रावास में बृहस्पतिवार को पानी की जांच करते छात्र। टीडीएस आया 653। -अमर उजाला
छात्रावास में बृहस्पतिवार को पानी की जांच करते छात्र। टीडीएस आया 653। -अमर उजाला
छात्रावास में बृहस्पतिवार को पानी की जांच करते छात्र। टीडीएस आया 653। -अमर उजाला
छात्रावास में बृहस्पतिवार को पानी की जांच करते छात्र। टीडीएस आया 653। -अमर उजाला