फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नैक में ए प्लस प्लस ग्रेडिंग से जामिया और जेएनयू के बराबर पहुंचा लविवि, होगी सौगातों की बौछार

विज्ञापन
विज्ञापन
लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय ने राष्ट्रीय मूल्यांकन प्रत्यायन परिषद (नैक) की सर्वोत्तम ए प्लस प्लस ग्रेडिंग लाकर इतिहास रच दिया है। वह न सिर्फ प्रदेश में शीर्ष विवि बन गया है, बल्कि देश में जामिया और जेएनयू के बराबर खड़ा हो गया है। नैक में ए प्लस प्लस ग्रेड देश के चुनिंदा विश्वविद्यालयों को ही मिला है। इसमें जामिया, जेएनयू, आईआईएससी बेंगलुरु, इग्नू, वनस्थली विद्यापीठ राजस्थान, एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी तमिलनाडु के साथ लविवि ने भी स्थान बनाया है। विवि को मिली यह सर्वोत्तम ग्रेडिंग छात्रों, शिक्षकों सहित सभी के लिए सौगातों की बौछार करेगी।
विज्ञापन

कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने कहा कि आज लविवि को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। हम देश के शीर्ष संस्थानों में शामिल हो गए हैं। यह गर्व और अत्यधिक खुशी का विषय है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लविवि ने सबसे पहले और विधिवत तरीके से लागू किया। नैक की टीम ने भी इसे सराहा था। सात मापदंडों में प्रमुख रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर एंड लर्निंग रिसोर्स और इंस्टीट्यूशनल वैल्यू एंड बेस्ट प्रैक्टिसेज में हमें सर्वाधिक नंबर मिले। ओवर ऑल हमें 3.55 सीजीपीए मिला है। यह ग्रेडिंग पांच साल के लिए मान्य होगी। उन्होंने बताया कि हमने विवि में ऑनलाइन टीचिंग, स्मार्ट क्लास से लेकर लैब, साइबर लाइब्रेरी आदि की सुविधाएं दी हैं। इसी तरह छात्र केंद्रित वीसी केयर फंड, संवर्धन, ट्री, शोध मेधा छात्रवृत्ति, कर्मयोगी योजना आदि की शुरुआत की। हमारे पूर्व छात्र विश्व के कोने-कोने में हैं। इन सभी ने सामूहिक रूप से हमें सफलता दिलाई।
प्लेसमेंट से लेकर रिसर्च ग्रांट तक में होगा फायदा
कुलपति ने बताया कि नैक में ए प्लस प्लस ग्रेडिंग मिलने का विवि के शिक्षकों, कर्मचारियों व विद्यार्थियों सभी को लाभ मिलेगा। अब प्लेसमेंट के लिए हमें कंपनियों के पास नहीं जाना होगा, कंपनियां हमारे पास आएंगी। छात्रों को अन्य केंद्रीय छात्रवृत्ति मिलेंगी। यहां से निकलने वाले छात्रों व शोधार्थियों को वरीयता मिलेगी। इसी तरह केंद्र की रिसर्च ग्रांट में लविवि को प्राथमिकता दी जाएगी। शिक्षकों को व्यक्तिगत प्रोजेक्ट प्राथमिकता पर मिलेंगे। विवि कोई नई योजना शुरू करेगा तो उसमें वरीयता दी जाएगी। विवि ओपेन डिस्टेंस लर्निंग शुरू कर सकेगा। अपना ऑनलाइन सर्टिफिकेट प्रोग्राम शुरू कर सकेंगे। इंस्टीट्यूट ऑफ एक्सीलेंस व इंस्टीट्यूट ऑफ एमीनेंस का दर्जा और ग्रांट मिल सकती है।
विज्ञापन

विवि से लेकर कॉलेजों तक जश्न का माहौल
लविवि को नैक में सर्वोत्तम नैक ग्रेडिंग मिलने पर विवि से लेकर संबद्ध कॉलेजों तक जश्न का माहौल था। ग्रेडिंग की जानकारी होने के बाद से ही कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय को बधाई देने वालों का तांता लग गया। शिक्षकों, कर्मचारियों व छात्रों सभी ने इस पर खुशी जताई और मिठाई बांटी। फिजिक्स विभागाध्यक्ष प्रो. एनके पांडेय के नेतृत्व में ढोल-नगाड़े की थाप पर जुलूस निकाला गया। कॉलेजों के प्राचार्यों व शिक्षकों ने भी विवि पहुंचकर कुलपति को बधाई दी। लविवि शिक्षक संघ व लविवि सहयुक्त महाविद्यालय शिक्षक संघ ने भी कुलपति से मिलकर बधाई दी है।
किसमें कितने अंक मिले
मापदंड प्राप्त अंक कुल अंक
1. कॅरिकुलम एसपेक्टस 3.6 4
2. टीचिंग-लर्निंग एंड इवैलुएशन 3.53 4
3. रिसर्च, इनोवेशन एंड एक्सटेंशन 3.56 4
4. इंफ्रास्ट्रक्चर एंड लर्निंग रिसोर्स 3.76 4
5. स्टूडेंट सपोर्ट एंड प्रोग्रेशन 3.32 4
6. गर्वनेंस, लीडरशिप एंड मैनेजमेंट 3.28 4
7. इंस्टीट्यूशनल वैल्यूज एंड बेस्ट प्रैक्टिसेज 3.75 4
चार स्टार से ए प्लस प्लस तक
लविवि स्थापना के 102 वर्ष पूरे कर रहा है। इस दौरान यह उसका तीसरा नैक मूल्यांकन था। विवि ने सबसे पहले 2002 में नैक में चार स्टार प्राप्त किए थे। उस समय सर्वश्रेष्ठ रैकिंग पांच स्टार थी। वहीं, 2014 में विवि को बी ग्रेड मिला था। तब ए, बी, सी, डी ग्रेड दिया जाता था। इसके आठ साल बाद 2022 में जब विवि तीसरी बार नैक मूल्यांकन में गया तो उसे सर्वोत्तम ग्रेडिंग ए प्लस प्लस मिली है।
नेशनल पीजी की रैंक गिरी, करेगा अपील
लविवि के साथ नेशनल पीजी कॉलेज ने भी नैक के लिए आवेदन किया था। यहां भी 21 व 22 जुलाई को टीम ने स्थलीय निरीक्षण किया था। मंगलवार को जारी परिणाम में कॉलेज को बी प्लस प्लस ग्रेडिंग से संतोष करना पड़ा, जबकि पिछली बार कॉलेज को ए ग्रेड मिला था। प्राचार्य प्रो. देवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि हमें रिसर्च इनोवेशन एंड एक्सटेंशन में व स्टूडेंट सपोर्ट एंड प्रोग्रेसन में कम नंबर मिले हैं। ओवरऑल 2.8 सीजीपीए मिला है। हमने जो एसएसआर सब्मिट की थी, उसमें कुछ डॉक्यूमेंट स्वीकृत नहीं किए गए। हम री-एसेसमेंट की नैक में अपील करेंगे।
102 साल के विवि के सामने थीं कई चुनौतियां
लविवि के लिए इतनी लंबी छलांग लगाना आसान नहीं था। 102 साल पुराने विश्वविद्यालय के सामने कई चुनौतियां थीं। सबसे बड़ी चुनौती विश्वविद्यालय का पुराना इंफ्रास्ट्रक्टर व बिल्डिंग थी। इसी तरह शिक्षकों की कमी थी, जिसे हाल के दिनों में काफी पूरा किया गया है। आर्थिक संकट सबसे ज्यादा था। अब चार जिलों रायबरेली, सीतापुर, हरदोई व लखीमपुर खीरी के कॉलेजों के जुड़ने के बाद यह धीरे-धीरे कम हुआ है। शिक्षकों व छात्रों के लिए शोध सुविधाओं व सीड मनी का अभाव था। कुलपति प्रो. राय ने भी माना कि आर्थिक चुनौतियों से पार पाना आसान नहीं था।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें