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Lucknow News: लखनऊ विश्वविद्यालय को विदेशी फीस से मिला कुल बजट का 10 फीसदी हिस्सा

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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में विदेशी विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने का असर संस्था की आर्थिक सेहत पर भी पड़ रहा है। अनुदान फ्रीज होने की वजह से लविवि को हर साल सरकार से सिर्फ 34 करोड़ रुपये ही मिल रहे हैं। वहीं विदेशी छात्रों से ही विश्वविद्यालय को हर साल तीन करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि फीस के रूप में मिल रही है।
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लखनऊ विश्वविद्यालय में पिछले कई साल से विदेशी विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस समय यहां तीन साै से ज्यादा विदेशी विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। लविवि में स्नातक के परंपरागत पाठ्यक्रमों के लिए विदेशी विद्यार्थियों से एक हजार डाॅलर, परास्नातक के लिए 1500 डाॅलर, पीएचडी के लिए 2500 डाॅलर और बीटेक और अन्य प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों के लिए 2500 रुपये डाॅलर फीस ली जा रही है। हर साल यह रकम तीन करोड़ रुपये से ज्यादा की बन रही है। तरह से प्रदेश सरकार से मिले बजट से 10 फीसदी के बराबर राशि सिर्फ विदेशी विद्यार्थियों से ही मिल रही है।

अनियमित नियुक्तियों के कारण फ्रीज हुई थी ग्रांट

लविवि को पिछले 25 साल से शासन से एकमुश्त राशि ही मिल रही है। शासन ने लविवि में कर्मचारियों की अनियमित और मनमानी नियुक्ति की वजह से ग्रांट फ्रीज कर दी थी। तब से इसे सिर्फ 34 करोड़ रुपये सालाना अनुदान ही मिलता है। बीच में यह राशि बढ़ाने की बात कही गई, लेकिन शासन से औसत अनुदान के रूप में कभी भी इस रकम से ज्यादा धनराशि नहीं मिली।
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परीक्षा फीस है आय का सबसे बड़ा स्रोत
लविवि के पास इस समय लखनऊ के साथ ही रायबरेली, हरदोई, लखीमपुर खीरी और सीतापुर जनपद के काॅलेज संबद्ध हैं। इन काॅलेजों से मिलने वाली परीक्षा ही आय का सबसे बड़ा स्रोत है। लविवि इस समय सबसे ज्यादा परीक्षा फीस लेने वाला राज्य विश्वविद्यालय है।
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