दिल्ली, हावड़ा, मुम्बई, चेन्नई के छह रूटों पूरे रेलवे का 16 प्रतिशत नेटवर्क कवर करते हैं। इन रूटों पर 58 फीसदी मालगाड़ी और 52 प्रतिशत सवारी गाड़ियां चलती हैं। ऐसे में मिशन रफ्तार से इन ट्रेनों का संचालन बेहतर हो जाएगा। वहीं रेलवे की आय में कई गुना बढ़ोतरी हो सकेगी।
वर्तमान में मेल-सुपरफास्ट की औसत स्पीड 55 किमी प्रति घंटा
मौजूदा समय में इन छह रूटों पर मालगाड़ी की औसत रफ्तार 25-27 किमी प्रतिघंटा है। जबकि मेल व सुपरफास्ट एक्सप्रेस 55 किमी प्रतिघंटा और शताब्दी-राजधानी जैसी प्रीमियम ट्रेनें 80-85 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से संचालित होती हैं। आने वाले समय में इन तीनों श्रेणियों के ट्रेनों की औसत रफ्तार में और 25 किमी प्रति घंटे की वृद्धि की तैयारी है।
लखनऊ-दिल्ली ट्रैक के किनारे 400 करोड़ रुपये से लगेगी बाड़
लखनऊ से दिल्ली के बीच करीब पांच सौ किमी का रेलवे सफर है। मिशन रफ्तार के तहत जब इस रूट पर ट्रेनों की स्पीड बढ़ाई जाएगी तो ट्रैक के किनारे बाड़ लगाई जाएगी। इस पर 80 लाख प्रति किमी का खर्च आएगा। यानी पांच सौ किमी पर चार सौ करोड़ रुपये का खर्च। वहीं, फेंसिंग व अन्य मेंटेनेंस के चलते मिशन रफ्तार में एक किमी ट्रैक पर आठ से नौ करोड़ रुपये का खर्च आने की संभावना है।