खास बात यह है कि लखनऊ हत्या, लूट, दुष्कर्म के अलावा अपहरण जैसे संगीन मामले में भी गाजियाबाद और कानपुर से बहुत आगे है। आंकड़ों के मुताबिक राजधानी में गाजियाबाद से 20 गुणा से भी ज्यादा मामले दर्ज किए गए। वहीं, कानपुर से दोगुणा मामले सामने आए। इन आंकड़ों ने राजधानी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आंकड़े एक नजर में
राजधानी में वर्ष 2021 में अपहरण के 773, वर्ष 2022 में 293 और वर्ष 2023 में 720 मामले पंजीकृत हुए। वहीं, कानपुर में वर्ष 2021 में 152, वर्ष 2022 में 341 और वर्ष 2023 में 373 मामले सामने आए। खास बात है कि गाजियाबाद में वर्ष 2021 में 50, 2022 में 55 और 2023 में महज 33 केस ही देखने को मिले।
अपहरण के मामलों में किशोरियों की संख्या ज्यादा
राजधानी में अपहरण के मामले में 16 साल से कम उम्र की किशोरियों की संख्या ज्यादा है। आंकड़ों के मुताबिक छह साल से कम उम्र की छह बच्चियां, छह से 12 साल की 26 बालिकाएं और 12 से 16 साल की 100 किशोरियों का वर्ष 2023 में अपहरण किया गया था। वहीं, कानपुर में 12 से 16 आयु वर्ग की 76 किशोरियों को अगवा किया गया था। गाजियाबाद में यह आंकड़ा शून्य दर्शाया गया है।