लखनऊ विश्वविद्यालय का सुभाष छात्रावास।
- फोटो : amar ujala
वह बलिया के निवासी थे और इतिहास, हिंदी व पॉलिटी (एनईपी) विषयों की पढ़ाई कर रहे थे। प्रारंभिक तौर पर मामला आत्महत्या का बताया जा रहा है।
हाॅस्टल में माैके पर माैजूद छात्रों ने बताया कि सुबह करीब 8 बजे कमरे का दरवाजा खटखटाया गया, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। दोपहर 12:30 बजे दोबारा प्रयास किया गया, तब भी अंदर से जवाब नहीं आया। इस दौरान मोबाइल फोन पर लगातार गाने बजने की आवाज सुनाई दे रही थी।
कमरा नं 52 का दरवाजा दोपहर तक नहीं खुलने पर हाॅस्टल के छात्रों को अनहोनी की आशंका हुई। छात्रों ने बताया कि प्रोवोस्ट के निर्देश पर जब दोपहर में दरवाजा तोड़ा गया तो मृत नवीन का मोबाइल चार्जिंग में लगा था और उसमें गाने बज रहे थे। जिस सफेद रंग की रस्सी के सहारे नवीन का शव लटका मिला वह बिल्कुल नई और मजबूत थी।