प्रदेश में कोरोना संक्रमण का प्रकोप कम हो रहा है, वहीं ब्लैक फंगस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। राजधानी के अस्पतालों में रविवार को ब्लैक फंगस ने पॉवर कॉर्पोरेशन के अधीक्षण अभियंता समेत दो मरीजों की जान ले ली।
गोंडा में पॉवर कॉर्पोरेशन के अधीक्षण अभियंता सुनील कुमार को कोरोना पॉजिटिव होने पर लखनऊ के चंदन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद उनकी रिपोर्ट निगेटिव आ गई, लेकिन वह ब्लैक फंगस की चपेट में आ गए। रविवार को इलाज के दौरान उनकी जान चली गई। सुनील कुमार लखीमपुर के रहने वाले थे। पदोन्नति के बाद बतौर अधीक्षण अभियंता गत 26 फरवरी को ही गोंडा में तैनात हुए थे।
वहीं, गोरखपुर निवासी 54 वर्षीय मरीज को 14 मई को सिप्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के प्रमुख डॉ. राज मिश्र ने बताया कि घातक फंगस मरीज के दिमाग तक पहुंच चुका था। तमाम कोशिश के बावजूद मरीज को बचाया नहीं जा सका। उन्होंने बताया कि अब तक अस्पताल में ब्लैक फंगस के छह मरीज आ चुके हैं। इनमें तीन की तबीयत स्थिर है, उन्हें समय-समय पर बुलाकर इलाज दिया जा रहा है। इन मरीजों का ऑपरेशन भी हो चुका है। बाकी दो मरीज अब भी अस्पताल में भर्ती हैं।
स्टेरॉयड के इस्तेमाल में सावधानी की सलाह
विशेषज्ञ डॉक्टरों के अनुसार ब्लैक फंगस यानी म्यूकोरमाइकोसिस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। संक्रमण के इलाज के दौरान स्टेरॉयड दवा के प्रयोग से रोग व्यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इससे ब्लैक फंगस के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। यह फंगस लकड़ी, गोबर के कंडे, गमले व नाक में पाया जाता है।
इसके अलावा फंगस से संक्रमित होने का दूसरा कारण ऑक्सीजन मास्क का संक्रमित होना भी हो सकता है। डायबिटीज के मरीजों को कोरोना की चपेट में आने के बाद स्टेरॉयड डॉक्टर की सलाह पर ही लेने की सलाह दी गई है। डायबिटीज मरीजों में पहले से ही रोगों से लड़ने की ताकत कम होती है। ऐसे में स्टेरॉयड का उपयोग उनके लिए घातक हो सकता है।