कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पीपीई किट पहनकर जाते पुजारी।
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लखनऊ में एसजीपीजीआई के डॉक्टरों को अब भारतीय कंपनियों की पीपीई किट व मास्क मिलेंगे। संस्थान में इसकी आपूर्ति हो गई है। इसकी गुणवत्ता पर भी चिकित्सकों ने भरोसा जताया है। इससे पहले डॉक्टरों ने चीन में निर्मित पीपीई किट की क्वालिटी पर सवाल खड़े किए थे। एसजीपीजीआई, केजीएमयू व लोहिया संस्थान में उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन की ओर से पीपीई किट, मास्क, ग्लव्स व अन्य सामग्री की आपूर्ति की जा रही है। माहभर पहले एसजीपीजीआई के रेजिडेंट डॉक्टरों ने किट सहित अन्य सुरक्षा उपकरणों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने हड़ताल तक की चेतावनी दे दी थी। इस पर पीजीआई प्रशासन ने रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ बैठक की।
मामले की गंभीरता को समझते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों ने भी बैठक बुलाई। इसमें प्रदेशभर के मेडिकल कॉलेजों में प्रयोग होने वाले उपकरणों और एम्स नई दिल्ली सहित अन्य उच्च संस्थानों में प्रयोग होने वाले उपकरणों की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया गया। इसके बाद तय किया गया कि पीजीआई सहित अन्य संस्थानों को डॉक्टरों की मांग के अनुरूप गुणवत्तायुक्त उपकरण दिए जाएंगे। मेड इन चाइना वाले उपकरण प्रयोग नहीं किए जाएंगे। दो दिन पहले पीजीआई में मेड इन इंडिया उपकरण पहुंच गए हैं। रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि भारतीय कंपनियों की ओर से दिए गए उपकरण में सिलाई की कोटिंग डबल है। वह पहले की अपेक्षा ज्यादा सहुलियत वाली हैं। इन्हें पहनकर मरीजों का उपचार करने में ज्यादा दिक्कत नहीं हो रही है।
‘अमर उजाला’ ने उठाया था मुद्दा
‘अमर उजाला’ ने एक अगस्त को माई सिटी पेज दो पर ‘पीजीआई : पहनते ही फट जाते हैं मास्क और पीपीई किट’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर छपने से पीजीआई सहित अन्य संस्थानों में हलचल मच गई थी। इस मामले को लेकर शासन स्तर पर बैठक हुई। इसमें पीपीई किट की गुणवत्ता को लेकर मानक तय किए गए। इसके बाद भारतीय कंपनियों के किट व मास्क उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।