अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से आई नन्हीं सी जान को संजय गांधी पीजीआई के चिकित्सकों ने नई जिंदगी दी। नौ महीने के शाहिद जान मोहम्मद को पैदाइश से ही दिल की गंभीर बीमारी थी। उसके फेफड़े से उसके दिल को खून की जो आपूर्ति हो रही थी, वह बाएं हिस्से में न जाकर दाहिने हिस्सें में ही जा रहा था।
इसके चलते उसका शरीर नीला पड़ जाता था। साथ ही खून की आपूर्ति न होने से वह बहुत कमजोर था। काबुल के एक चिकित्सक के फाउंडेशन की मदद से उसका पीजीआई में सीटीवीएस विभाग के हेड प्रो. निर्मल गुप्ता और डॉ. वरुणा वर्मा की अगुवाई में ऑपरेशन किया गया। अब बच्चा धीरे-धीरे स्वस्थ हो रहा है।
प्रो. निर्मल गुप्ता और प्रो. वरुणा वर्मा ने बताया कि शाहिद जान मोहम्मद को ऑब्सट्रक्टेड टोटल एनामॉलस पल्मोनरी वेनस कनेक्शन (टीएपीवीसी) नाम की जन्मजात विकृति थी। सर्जरी से ठीक होने वाली इस विकृति का काबुल में इलाज नहीं था।
वहां के अस्पताल में तैनात डॉ. रहमतउल्लाह, जो कि मरीजों की मदद के लिए एक फाउंडेशन भी चलाते हैं, उन्होंने शाहिद के इलाज का बीड़ा उठाया था। डॉ. रहमतउल्लाह ने बेंगलूरू से चिकित्सा की पढ़ाई की है। इसी दौरान वह प्रो. निर्मल गुप्ता के संपर्क में आए थे। उन्होंने प्रो. निर्मल गुप्ता से शाहिद की बीमारी के बारे में बात की और सर्जरी करने का आग्रह किया था।
ऐसे शुरू हुआ इलाज
शाहिद
बीमारी के बारे में समझने के बाद शाहिद को सर्जरी के लिए एसजीपीजीआई आने की सलाह दी गई। रहमतउल्लाह फाउंडेशन की मदद से काबुल निवासी जान मोहम्मद अपने बेटे शाहिद को लेकर पहले दिल्ली पहुंचे।
वहां उन्होंने एक निजी अस्पताल में उसकी जांच कराई। इस रिपोर्ट को लेकर वह 10 अगस्त को एसजीपीजीआई पहुंचे। शाहिद की रिपोर्ट को देखने और जांच करने के बाद पता चला कि उसे दिल की पैदाइशी विकृति टीएपीवीसी है, जिसका इलाज सर्जरी से ही संभव है।
इसके बाद 11 अगस्त को उसे भर्ती कर लिया गया। इसके बाद उसकी पीजीआई के कार्डियोलॉजी विभाग के डॉ. नवीन गर्ग से ईको जांच कराई गई। इस जांच में पुष्टि हो गई कि शाहिद को दिल की पैदाइशी विकृति टीएपीवीसी ही है और उसकी पहले की जांच रिपोर्ट सही थी।
स्थिर बना हुआ है स्वास्थ्य
अस्पताल में शाहिद
डॉ. वरुणा ने बताया कि बीमारी के हिसाब से बच्चे की सर्जरी जितनी जल्दी हो जाए उतना अच्छा था लेकिन शारीरिक रूप से कमजोर और संक्रमण के चलते ऑपरेशन को कुछ दिन के लिए टाल दिया गया। जब वह भर्ती हुआ था उसका वजन लगभग साढ़े पांच किलोग्राम था।
इसलिए पहले सात दिन तक एंटीबायटिक देकर उसके शरीर के संक्रमण को ठीक किया गया। इसके बाद सोमवार को उसकी सर्जरी की गई। सुबह 9.30 बजे शाहिद को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया और दोपहर दो बजे वह सर्जरी के बाद पोस्ट ऑपरेटिव आईसीयू में शिफ्ट किया गया। अब उसका स्वास्थ्य स्थिर है।
इस टीम ने की सर्जरी
प्रो. निर्मल गुप्ता, डॉ. वरुणा वर्मा, डॉ. अमित रस्तोगी, नरेश, एसएन ईस्थर, मुकेश, पर्फ्यूजनिस्ट विनय प्रताप सिंह।