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Lucknow News : कमिश्नरेट के गठन के तीसरे दिन भी नहीं हो सका अफसरों की तैनाती पर फैसला

Sun, 27 Nov 2022 10:12 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ

सार

सूत्रों का कहना है कि शीर्ष स्तर पर निर्णय नहीं लिया जा पा रहा है कि किस अफसर को कहां भेजा जाए। वहीं जिलों में पुलिस कमिश्नरेट के हिसाब से पदों के सृजन का प्रस्ताव भी अधर में लटका हुआ है।
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वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश के तीन जिलों में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू होने के तीन दिन के बाद भी जिलों में अफसरों की तैनाती नहीं हो सकी। वरिष्ठ अफसरों और शीर्ष स्तर पर कई बार बैठक के बाद भी निर्णय नहीं हो सका कि किस अफसर को कहां तैनाती दी जाए। रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ से अयोध्या ओर अयोध्या से गोरखपुर पहुंच गए। अब जो भी फैसला होगा मुख्यमंत्री के लौटने के बाद होगा।

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सूत्रों का कहना है कि शीर्ष स्तर पर निर्णय नहीं लिया जा पा रहा है कि किस अफसर को कहां भेजा जाए। वहीं जिलों में पुलिस कमिश्नरेट के हिसाब से पदों के सृजन का प्रस्ताव भी अधर में लटका हुआ है। यह प्रस्ताव 25 नवंबर को ही शासन को भेज दिया गया था। शासन स्तर पर कैबिनेट में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू करने के निर्णय के बाद उसकी अधिसूचना भी 26 नवंबर को जारी कर दी गई।

इसका मतलब यह हुआ कि संबंधित जिलों में पुलिस से संबंधित अधिकतर मामलों में मजिस्ट्रेट का हस्तक्षेप समाप्त हो चुका है। ऐसे में आगरा, प्रयागराज और गाजियाबाद में तैनात अफसर भी उहापोह में हैं कि उनकी अब क्या भूमिका है। पुलिस कप्तान प्रभारी पुलिस आयुक्त के रूप में काम करें या पूर्व की तरह काम करते रहें।
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सूत्रों का कहना है कि नए पुलिस कमिश्नरेट में केवल तीन-तीन जोन के साथ डीसीपी के भी केवल तीन ही पद के सृजन का प्रस्ताव है। ऐसे में पूर्व में गठित पुलिस कमिश्नरेट में जोन के अतिरिक्त यातायात, अपराध, महिला सुरक्षा और प्रोटोकाल जैसे पदों के लिए अलग-अलग डीसीपी के पदों का सृजन किया गया था।

मसलन लखनऊ में कुल 10 डीसीपी के पद, गौतमबुद्घनगर में 7 पद, कानपुर नगर पुलिस कमिश्नरेट में 6 पद और वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट में पांच पदों का सृजन किया गया था। जबकि तीन नए गठित कमिश्नरेट में 3-3 डीसीपी का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त एक पुलिस आयुक्त और एक अपर पुलिस आयुक्त के पद भी सृजित किए जाएंगे। यानी एक कमिश्नरेट में आईपीएस संवर्ग के अधिकारियों की संख्या पांच रहेगी।

नई कमिश्नरेट में पहले से तैनात हैं एसपी रैंक के 11 अफसर
मौजूदा समय में गाजियाबाद में जो चार आईपीएस अधिकारी तैनात हैं उसमें 2009 बैच के एसएसपी मुनिराज जी, 2017 बैच की आईपीएस दीक्षा शर्मा, निपुन अग्रवाल और इराज राजा सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात हैं। लखनऊ में इसी 2017 बैच के दो अफसर एसएम कासिम आब्दी और प्राची सिंह पुलिस उपायुक्त के पद पर तैनात हैं। इसी तरह आगरा में भी एसपी रैंक केचार अफसर मौजूदा समय में तैनात हैं।

इसमें 2010 बैच के आईपीएस प्रभाकर चौधरी बतौर एसएसपी हैं। जबकि सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में 2017 बैच के आईपीएस सत्यजीत गुप्ता, विकास कुमार और सोमेंद्र मीना की तैनाती है। वहीं प्रयागराज में  मौजूदा समय में एसपी रैंक के तीन अफसरों की तैनाती है। इसमें 2011 बैच के शैलेश कुमार पांडेय एसएसपी के रूप में और 2017 बैच के आईपीएस सौरभ दीक्षित और अभिषेक कुमार अग्रवाल सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनात हैं।

डीसीपी के पद पर 2015, 2016 और 2017 के अफसरों की हो सकती है तैनाती
नई कमिश्नरेट में डीसीपी के 9 पद सृजित किए जा रहे हैं। इन पदों पर 2015, 2016 और 2017 बैच के अफसरों की तैनाती की जा सकती है। इसके पीछे की वजह यह बताई जा रही है कि यहां अपर पुलिस आयुक्त का पद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक का होगा। ऐसे में उससे जूनियर अफसरों को ही डीसीपी के रूप में तैनाती दी जाएगी।

क्या इनको भी मिलेगी तैनाती
मौजूदा समय में 10 आईपीएस अफसर प्रतीक्षारत हैं। इसमें एडीजी रैंक के चार अफसर शामिल हैं। कानपुर पुलिस आयुक्त के पद से हटाए गए विजय सिंह मीणा, लखनऊ पुलिस आयुक्त के पद से हटे ध्रुव कांत ठाकुर, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से लौटे मुथा अशोक जैन और छुट्टी से लौटे जीके गोस्वामी प्रतीक्षारत हैं। इसके अलावा निलंबन के बाद बहाल किए गए डीआईजी अनंत देव, एसपी पवन कुमार, उन्नाव से हटाए गए दिनेश त्रिपाठी, गाजीपुर से हटाए गए रोहन बोत्रे और मुरादाबाद से हटाए गए हेमंत कुटियाल का नाम शामिल है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इन अफसरों की तैनाती भी इसी सूची में हो सकती है।

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