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Lucknow News : बैंककर्मियों को जिम्मेदार ठहराकर कारोबारी ने फांसी लगाकर दी जान, छात्रा ने लगा ली फांसी

Sun, 20 Aug 2023 09:42 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ

सार

एडीसीपी ने बताया कि बरामद सुसाइड नोट में तीन बैंक कर्मियों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है।  उसमें लिखा है- बैंककर्मियों ने मुझको फंसाकर लोन करवा दिया। इससे मेरी जिंदगी तबाह हो गई है। इसी प्रताड़ना से तंग आकर खुदकुशी कर रहा हूं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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लखनऊ में वृंदावन सेक्टर-11 में शनिवार रात एक कारोबारी ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। रविवार सुबह जब परिजनों को जानकारी हुई तब पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस की छानबीन में घटनास्थल से एक सुसाइड नोट मिला है। इसमें कारोबारी ने खुदकुशी के लिए तीन बैंककर्मियों को जिम्मेदार ठहराया है। आरोप है कि ये बैंककर्मी उस पर दबाव बना रहे थे। तरह-तरह से प्रताड़ित करते थे। फिलहाल पुलिस को तहरीर नहीं मिली है।

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मूलरूप से लखीमपुर निवासी राकेश कुमार शुक्ला (53) पीजीआई इलाके में स्थित कासा ग्रीन अपार्टमेंट में पत्नी मानवता व बेटे अभिष्ठ के साथ रहते थे। उनकी प्लाईवुड व ग्लो साइन बोर्ड बनाने की मोहनलालगंज में फैक्टरी है। वृंदावन सेक्टर-11 में उनका एक मकान है। इसमें किराए पर स्कूल चलता है। इसी मकान में वह शनिवार रात सोने के लिए गए थे। पत्नी व बेटा फ्लैट में थे। रविवार सुबह करीब आठ बजे से परिजन उनसे संपर्क करने के लिए उनको कॉल कर रहे थे, लेकिन रिसीव नहीं हुई। इसपर उनके भतीजे हर्षित मकान पर पहुंचे। मकान का मुख्य गेट व कमरे का दरवाजा खुला मिला। भीतर फंदे पर राकेश का शव लटकता मिला। पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया गया।

बैंककर्मियों की वजह से खुदकुशी कर रहा हूं...
एडीसीपी पूर्वी अली अब्बास ने बताया कि बरामद सुसाइड नोट में तीन बैंक कर्मियों पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है। सूत्रों के मुताबिक उसमें लिखा है- बैंककर्मियों ने मुझको फंसाकर लोन करवा दिया। इससे मेरी जिंदगी तबाह हो गई है। इसी प्रताड़ना से तंग आकर खुदकुशी कर रहा हूं। इन तीनों बैंक कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए...।
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72 लाख के लोन का है मामला, बैंककर्मियों पर दर्ज हो चुका है केस
एडीसीपी ने बताया कि इंडियन बैंक से 72 लाख रुपये का लोन राकेश के नाम पर हुआ था। लोन न चुकाने पर खाता एनपीए हो गया था। कुछ समय पहले कोर्ट के आदेश पर राकेश ने बैंककर्मियों पर एक एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि ये लोन उन्होंने नहीं लिया, बल्कि बैंककर्मियों ने हेरफेर कर उनके नाम पर लोन खाता खोलकर रकम ले ली। इसी वजह से वह तनाव ग्रस्त थे। सूत्राें के मुताबिक लोन संबंधी कोई नोटिस भी मिला था। इससे वे बेहद परेशान थे। इन बातों का राकेश ने सुसाइड नोट में भी जिक्र किया है।

परेशान थे राकेश, मकान बेचने की बात कर रहे थे
वहीं यह भी सामने आ रहा है कि राकेश अपना मकान बेचने के लिए कुछ लोगों से बातचीत कर रहे थे। इससे पता चलता है कि वह कर्ज के दबाव में थे। शायद इसी वजह से वह मकान बेचने पर विचार कर रहे थे। हालांकि राकेश के परिजन मामले में पूरी तरह से खामोश हैं।

करोड़ों का है कारोबार
मोहनलालगंज के गौरा गांव में राकेश की नारायणा नाम की प्लाईवुड व ग्लो साइन बोर्ड बनाने की एक फैक्टरी है। इसमें दर्जनों लोग काम करते हैं। उनके एक मकान में किराए पर प्ले स्कूल चलता है। जानकारी के मुताबिक कुछ वक्त पहले उन्होंने कंस्ट्रक्शन का काम भी शुरू किया था, लेकिन उसमें घाटा हो गया। हालांकि, इसको लेकर परिजनों ने कोई जानकारी नहीं दी।

तहरीर मिलने पर की जाएगी जांच
बरामद नोट में लोन व बैंक संबंधी विवाद का जिक्र है। इसमें तीन बैंककर्मियों के नाम लिखे हैं और उनको जिम्मेदार ठहराया गया है। अभी तक तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलती है तो जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। - सैयद अली अब्बास, एडीसीपी पूर्वी

पुलिस का दावा : परीक्षा के तनाव में छात्रा ने की खुदकुशी
लखनऊ में मड़ियांव के जुगल विहार फैजुल्लागंज में रितिका मिश्रा (21) ने फांसी लगा ली। वह सीतापुर रोड स्थित एक निजी इंस्टिट्यूट से बैचलर ऑफ एलिमेंट्री एजुकेशन (B.El.Ed) की तृतीय वर्ष की छात्रा थी। परिजनों का कहना है कि आत्महत्या की वजह पता नहीं है। वहीं इंस्पेक्टर शिवानंद मिश्र ने बताया कि छात्रा के पेपर होने वाले थे। संभवत उसने तनाव में आकर आत्महत्या की है। छात्रा के मोबाइल को कब्जे में ले लिया है।

मृतका के पिता व लविवि कर्मचारी अंबरीश मिश्रा ने बताया कि शनिवार रात खाना खाने के बाद रितिका ने अपने मामा-मामी को वीडियो कॉल की। बात करने के बाद सोने चली गई। रविवार सुबह जब उसकी मां प्रतिभा उसे जगाने गईं तो छात्रा का शव दुपट्टे के सहारे फंदे से लटकता देखा। हादसे से परिवार में कोहराम मच गया। अंबरीश ने बताया कि बेटी पढ़ने में होशियार थी। हर साल 80 फीसदी से ऊपर नंबर आते थे। आत्महत्या क्यों की, इसका पता परिवार वालों को नहीं है।

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