अगर सभी चुनावों में एक ही मतदाता सूची का इस्तेमाल होगा तो इसका लाभ वोटरों को ज्यादा मिलेगा। गड़बड़ी कम होगी और उस पर फोटो होने के कारण मत का दुरुपयोग भी नहीं हो सकेगा। वास्तविक मतदाता ही अपना वोट डाल सकेगा। अब राज्य निर्वाचन आयोग भी इस दिशा में काम करने की तैयारी में है, जिसकी मांग काफी समय से की जा रही है। कई राज्य इस पर काम कर रहे हैं, पर यूपी में अभी इस पर अमल नहीं हो पाया है।
एक ही मतदाता सूची का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि वास्तविक मतदाता ही अपना वोट डाल सकेगा, क्योंकि उसके फोटो का उसके किसी भी सरकारी पहचान पत्र से मिलान किया जाएगा। मसलन, विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव में वह अपने गांव में वोट डालता है तो उसका नाम शहर में निगम की सूची में भी है। इन्हें अलग-अलग करने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसी तरह से पालिका और पंचायतों में भी गड़बड़ी की आशंका ज्यादा होती है। जब एक ही वोटर लिस्ट होगी तो यह गड़बड़ी स्वत: ही समाप्त हो जाएगी। विभिन्न राजनीतिक दल भी इसकी मांग करते रहे हैं।
सपा प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि सपा की यह मांग काफी लंबे समय से है कि पूरे देश में एक ही वोटर लिस्ट हो। इस बाबत वह भारत सरकार और भारत निर्वाचन आयोग से भी मांग कर चुके हैं। उधर, रालोद प्रवक्ता अनिल दुबे कहते हैं कि वोटर लिस्ट तो एक ही होनी चाहिए, इससे गड़बड़ी कम होगी। इस निकाय चुनाव में लाखों लोगों के वोट कटे। यदि एक लिस्ट बने तो इस स्थिति से बचा जा सकेगा। लेकिन इसमें निकाय को अपना पुनरीक्षण अभियान उसी तरह से चलाना होगा, जिस तरह से साल में चार बार भारत निर्वाचन आयोग चलाता है, साथ ही जवाबदेही भी राज्य की होगी।