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Lucknow News : अंसल में सरकारी जमीन की जांच को लेकर सेटेलाइट सर्वे शुरू, जांच के बाद खाली कराई जाएगी जमीन

Mon, 29 May 2023 10:27 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

जांच के बाद अभियान चलाकर सरकारी जमीन को बिल्डर के कब्जे से मुक्त कराया जाएगा। इसको लेकर नगर निगम प्रशासन ने आदेश भी जारी कर काम शुरू कर सोमवार से काम शुरू दिया गया है जो चार जून तक पूरा कर लिया जाएगा।
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फाइल फोटो
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विस्तार
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जमीन की अनियमिताओं को लेकर सुर्खियों में बनी शहीथ पथ स्थित अंसल एपीआई की सुशांत गोल्फ सिटी कालोनी की नगर निगम रिमोट सेंसिंग विभाग में सेटेलाइट सर्वे करा रहा है। जिससे यह पता लगाया जाएगा कि कालेानी में कितने प्लाट, मकान, फ्लैट और पार्क व अन्य निर्माण नगर निगम की सरकारी जमीन पर किए हैं। जांच के बाद अभियान चलाकर सरकारी जमीन को बिल्डर के कब्जे से मुक्त कराया जाएगा। इसको लेकर नगर निगम प्रशासन ने आदेश भी जारी कर काम शुरू कर सोमवार से काम शुरू दिया गया है जो चार जून तक पूरा कर लिया जाएगा।

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शहीद पथ के पास असंल प्रापर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की सुशांत गोल्फ सिटी टाउनशिप है। जिसमें सीमा विस्तार के बाद नगर निगम में आए माढरमऊ कलां, सेनई, कंजेहरा, अहमामऊ, यूसुफनगर बगियामऊ, हरिहरपुर, देवामऊ, सेंवई, बरौना, मुजफ्फर नगर घुसवल, निजामपुर मझिगवां, हसनपुर खेवली व घुसवल कलां गांव की जमीन भी है। जिसमें नगर निगम की स्वमित्व वाली चकमार्ग, ऊसर बंजर, तालाब आदि की करीब 44.62 हेक्टेयर जमीन है।

जिसकी जानकारी बिल्डर ने नगर निगम को नहीं दी और न ही अनुमति ली। बीते साल नोटिस जारी हुई तो एक छोटी जमीन का विनियम करने का प्रस्ताव नगर निगम की बजाए एसडीएम को दिया। जिसे जांच के बाद नगर निगम ने उचित न पाते हुए निरस्त कर दिया। उसके बाद भी बिल्डर कंपनी ने सरकारी जमीन को न तो छोड़ा और न ही विनिमय का नय प्रस्ताव नगर निगम को दिया।
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बिल्डर का रहा शासनादेश का उल्लंघन
नगर निगम के अपर नगर आयुक्त अभय पांडेय ने बताया कि शासनादेश के तहत यदि बिल्डर कंपनी की योजना के बीच सरकारी जमीन आती है तो उसका विनियम (जमीन के बदल जमीन का एक्सचेंज) किया जा सकता है लेकिन उसके लिए पहले बिल्डर को अनुमति लेनी होती है और फिर अलग-अलग सरकारी जमीन के बदले एक जगह उतनी ही कीमत की जमीन देनी होती है। उसके बाद भी बिल्डर ने नियमों का पालन नहीं किया।

जितनी का उपयोग किया उसके बाद एक छोटे हिस्से की जमीन केलिए विनियमय का प्रस्ताव वह भी नियमों के उलट। एक जगह जमीन देने की बजाए अलग- अलग जमीन देने का प्रस्ताव दिया। वह भी ऐसी जमीन जो सरकारी जमीन की तुलना में कम महत्व और कम कीमत की है। प्रस्ताव निरस्त करने के बाद भी बिल्डर ने जमीन नहीं छोड़ी।

अंसल कालोनी की जमीन का रिमोट सेंसिग से सर्वे कराया जा रहा है। जिससे यह पता चलेगा कुल कितनी सरकारी जमीन बिल्डर के कब्जे में हैं। यह काम चार जून तक पूरा कर लिया जाएगा। उसके बाद अभियान चलाकर सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराया जाएगा।
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- अभय पांडेय, अपर नगर आयुक्त प्रशासन

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