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Lucknow News : अवैध शस्त्र लाइसेंस प्रकरण में बांदा जेल में बंद मुख्तार अंसारी से पूछताछ करेगी एसटीएफ

Mon, 29 May 2023 10:13 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

सपा विधायक अभय सिंह के साले संदीप सिंह को एसटीएफ ने अवैध शस्त्र लाइसेंस प्रकरण में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। एसटीएफ की जांच में सामने आया था कि संदीप ने जो फर्जी शस्त्र लाइसेंस नागालैंड में बनवाया था वह लखनऊ के हजरतगंज के दारुलशफा 107बी के पते पर ट्रांसफर कराया गया था।
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mukhtar ansari - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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अवैध शस्त्र लाइसेंस प्रकरण में एसटीएफ मुख्तार अंसारी से पूछताछ करेगी। इसके लिए टीम कोर्ट से अनुमति लेकर बांदा जेल जाएगी। मामले में सीधेतौर पर मुख्तार कनेक्शन सामने आया है। जानकारी के मुताबिक संदीप सिंह का फर्जी शस्त्र लाइसेंस में मुख्तार की ही भूमिका रही। इसलिए उसके पते पर संदीप सिंह ने अपना लाइसेंस स्थानांतरित कराया था।

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सपा विधायक अभय सिंह के साले संदीप सिंह को एसटीएफ ने अवैध शस्त्र लाइसेंस प्रकरण में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। एसटीएफ की जांच में सामने आया था कि संदीप ने जो फर्जी शस्त्र लाइसेंस नागालैंड में बनवाया था वह लखनऊ के हजरतगंज के दारुलशफा 107बी के पते पर ट्रांसफर कराया गया था। जो पता मुख्तार अंसारी का था। इसलिए एसटीएफ मुख्तार से पूछताछ करेगी। जिससे पता चल सकेगा कि आखिर उसके पते पर क्यों और कैसे लाइसेंस ट्रांसफर कराया गया था। इससे पूरे नेटवर्क उजागर होने की उम्मीद है।

कानपुर का एक गन हाउस मालिक से होगी पूछताछ
एसटीएफ के मुताबिक संदीप ने एक राइफल कानपुर के एक गन हाउस से खरीदी थी। अभी गन हाउस कौन सा था उस बारे में पूरी जानकारी नहीं हो सकी है। ये राइफल 2005 में खरीदी गई थी। इसलिए एसटीएफ इस बारे में तस्दीक कर रही है। पूछताछ में उसने कानपुर गन हाउस का नाम बताया था। इसका सत्यापन एसटीएफ कर रही है। जो भी गन हाउस होगा वहां के मालिक से पूछताछ कर दस्तावेज जुटाएगी।
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राइफल बचने वाले की तलाश
संदीप एक राइफल व पिस्टल रखता था। पिस्टल का लाइसेंस अयोध्या से बनाया गया था। संदीप ने पहली वाली राइफल बेचकर दूसरी राइफल खरीदी थी। एसटीएफ पता कर रही है कि ये राइफल खरीदी किसने थी। उससे भी पूछताछ की जाएगी।

पुलिस-प्रशासन की मिलीभगत के पुख्ता साक्ष्य
फर्जी लाइसेंस बनवाने व उनके नवीनीकरण में पुलिस प्रशासन के अफसरों की बड़ी भूमिका रही। संदीप के रसूख के आगे ये अफसर नतमस्तक रहे। यही वजह है कि कागजों पर सत्यापन होता रहा। आपराधिक इतिहास होने के बावजूद लाइसेंस बन गया। निरस्तीकरण की कार्रवाई तक नहीं की गई। पूरा खेल मिलीभगत से चलता रहा। सूत्रों के मुताबिक अफसरों की मिलीभगत के पुख्ता साक्ष्य सामने आए हैं। जल्द इन पर शिकंजा कसेगा।

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