प्राक्ललन समिति की जांच में नियमों को दरकिनार कर भुगतान किए जाने को सही पाया गया। बृहस्पतिवार को विधानसभा में जांच की रिपोर्ट रखी गई। समिति ने इस मामले में आरोपित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर अवगत कराने को कहा है।
इनवेस्टर समिट 2018 में होटल के कई कमरों में अतिथियों को ठहराया भी नहीं गया और उनके नाम पर बिना विधिवत परीक्षण के भुगतान भी कर दिया गया। शिकायत हुई थी कि लगभग 1.80 करोड़ के भुगतान किए गए थे। प्राक्ललन समिति की जांच में नियमों को दरकिनार कर भुगतान किए जाने को सही पाया गया। बृहस्पतिवार को विधानसभा में जांच की रिपोर्ट रखी गई। समिति ने इस मामले में आरोपित दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर अवगत कराने को कहा है।
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बताया गया कि 2018 के इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचिव व प्रमुख सचिव से की गई थी। इसकी शासन की ओर से जांच कराई गई। इसमें पाया गया कि कुछ होटलों में तीन दिन के लिए कमरों में ठहरने का भुगतान किया गया किंतु इसमें कोई रुका नहीं।
वहीं यह भी व्यवस्था दी गई थी। अतिथियों के कमरे बुक कराएं और कुछ रिजर्व रखें। जो कमरे रिजर्व होंगे, उनका प्रयोग न करने पर किराया नहीं देना होगा। किंतु होटलों की ओर से दिए गए बिल को बिना उच्च अधिकारियों से सत्यापित कराए, तत्कालीन अधिकारियों ने खुद सत्यापित करते हुए आगे की कार्रवाई के लिए भेज दिया। बिलों को बिना प्रमाणित किए जाने के मामले में कई अधिकारियों-कर्मचारियों की संलिप्तता है। वहीं प्रमुख सचिव पर्यटन मुकेश मेश्राम ने कहा कि जांच में जिन पर आरोपों की पुष्टि हुई है, उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।