लखनऊ में पारा के मर्दनखेड़ा में अकेली रहने वाली चंद्रावती (55) की हत्या उसके भतीजे ने अपने दोस्त केसाथ मिलकर की थी। चंद्रावती को मौत के घाट उतारने के बाद घर के अंदर रखे चार लाख रुपये जेवरात व नकदी लूट ली थी। वारदात को लूटपाट का रुप दिया। पुलिस ने इस वारदात का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके पास से लूटा गया जेवरात व 9500 रुपये नकद और वारदात में प्रयुक्त बाइक बरामद की है। पुलिस के मुताबिक भतीजे ने संपत्ति की लालच में वारदात को अंजाम दिया था।
डीसीपी दक्षिणी राहुल राज के मुताबिक पुलिस ने पारा के देवपुर मोड़ के पास से दो हत्यारोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गये आरोपियों में बिजनौर के भक्तिखेड़ा का अवधेश यादव और बुद्घेश्वर पारा का रहने वाला अजय श्रीवास्तव शामिल हैं। अवधेश मर्दनखेड़ा की चंद्रावती का सगा भतीजा है। उसने संपत्ति की लालच में चंद्रावती की हत्या की।
डीसीपी दक्षिण के मुताबिक 20 अगस्त की रात करीब 9 बजे अवधेश व अजय मर्दनखेड़ा चंद्रावती के घर पहुंचे। वहां चंद्रावती की गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद घर के अंदर रखे हुए जेवरात व 20 हजार रुपये समेट कर निकल गये। वारदात को अंजाम देने के समय दोनों आरोपियों ने अपने मोबाइल भी बंद कर रखे थे। ताकि पुलिस को उनके वहां होने का प्रमाण न मिल सके। वारदात के दूसरे दिन चंद्रावती की दत्तक पुत्री के पति संदीप ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। जिस पर पुलिस ने विवेचना शुरू की।
इस दौरान संपत्ति विवाद की बात सामने आई। पुलिस के मुताबिक संपत्ति का विवाद चंद्रावती व उसके भतीजे अवधेश के बीच चल रही थी। जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने इसकी पुष्टि की। फिर आरोपियों के बारे में वारदात के दिन की मौजूदगी के बारे में पता किया गया। पुलिस के मुताबिक जांच में अवधेश व अजय अपने घर पर वारदत के समय नहीं थे।
जेल में हुई थी अजय व अवधेश की मुलाकात
एसीपी काकोरी आशुतोष कुमार के मुताबिक अवधेश के खिलाफ 2002 में सरोजनीनगर में अमौसी एयरपोर्ट के पास टैक्सी स्टैंड संचालक अवधेश मिश्रा को अगवा कर हत्या करने का मुकदमा दर्ज हुआ था। जिसमें वह जेल गया था, लेकिन अवधेश मिश्रा का शव पुलिस आज तक बरामद नहीं कर सकी। वहीं 2019 में जुलेखा नाम की महिला को अगवा कर हत्या कर दी थी। जिसका पुलिस ने एक सप्ताह बाद सई नदी से बरामद किया था। वहीं 2019 में ही कृष्णानगर से अजय श्रीवास्तव पर टेली फिल्म बनाने का काम करने वाली महिला ने दुष्कर्म व जालसाजी का केस दर्ज कराया था। जिसमें वह गिरफ्तार हुआ। पुलिस केमुताबिक पूछताछ में सामने आया कि अवधेश व अजय की मुलाकात जिला जेल में हुई थी। वहीं से दोनों में दोस्ती हो गई। इसी दोस्ती की आड़ में अवधेश ने अपनी सगी चाची की हत्या की साजिश रच डाली।
कोचिंग व कमरे की लालच में शामिल हुआ अजय
प्रभारी निरीक्षक पारा दधिबल तिवारी के मुताबिक अजय श्रीवास्तव मूलरूप से सिद्घार्थनगर के तेतरी बाजार के सेमरनार का रहने वाला है। उसने एमएससी आर्गेनिक केमेस्ट्री से की है। उसे कोचिंग खोलना था। जिसके लिए उसे मकान तलाश रहा था। ऐसा मकान तलाश रहा था कि जिसमें उसे रहने का भी ठिकाना बन सके। अवधेश को इस बात की जानकारी हुई। तो अवधेश ने अपने चाची के मकान के बारे में बताया। इसके बाद लालच दिया कि खाली होने केबाद उसमें वह अपनी मर्जी से कोचिंग खोलकर कमाई भी कर सकता है। उसे रहने का भी ठिकाना मिल जाएगा। अजय इसी लालच में वारदात को अंजाम देने के लिए हामी भर दिया।
शुरू में लूटपाट से इंकार, फिर सामान बरामद
पारा पुलिस ने वारदात के दिन परिजनों द्वारा लगाये गये हत्या व लूटपाट के आरोप से साफ इंकार कर दिया था। लेकिन जब वारदात का खुलासा हुआ तो लूटपाट की बात सही नहीं निकली। पुलिस ने आरोपियों के पास से एक सोने की चेन, दो झुमके, दो वालियां, दो टप्स, छह कंगन, दो कील, एक मांग टीका, एक नथनी, तीन अंगूठी, एक हसुली, बत्तीस बिछिया, दो सिक्के चांदी के, छह पायल, 9500 नकदी, वारदात मे प्रयुक्त बाइक, दो मोबाइल, एक पर्स व आधार कार्ड व ड्राइविंग लाइसेंस बरामद हुआ है।