साइबर हैकर्स के जाल में फंसकर पवन गिरि के खुदकुशी करने के मामले में बरामद डायरी से एक और खुलासा हुआ है। फेसबुक पर पवन के तीन अकाउंट थे। तीनों में नाम अलग-अलग थे। एक ही फोन नंबर से ये सभी अकाउंट बनाए गए थे। मृतक का मोबाइल तफ्तीश में बेहद अहम है। उससे राज खुलने की उम्मीद है, जिससे खुदकुशी के जिम्मेदार बेनकाब हो सकते हैं। पुलिस ने रविवार को मृतक की डायरी व मोबाइल कब्जे में ले लिया है। तफ्तीश शुरू कर दी है, हालांकि परिजनों ने अब तक कोई तहरीर नहीं दी है।
विकासनगर सेक्टर-3 निवासी पवन गिरि ने शुक्रवार शाम घर पर ही फांसी लगा ली थी। शनिवार देर शाम पवन के कमरे से एक डायरी मिली थी। इसमें 51 पन्नों पर कई बातें लिखी थीं। इसमें ये भी तथ्य लिखा था कि उसने यूट्यूब पर पैसे कमाने के लिए एक लिंक पर क्लिक किया था। इससे वह हैकर्स के जाल में फंस गया और फिर फंसता गया। आशंका थी कि पवन ने इसी वजह से खुदकुशी कर ली। डायरी में ही एक पन्ने पर लिखा है कि तीन फेसबुक अकाउंट हैं। एक पवन गिरी के नाम से, दूसरा पीजी के नाम पर। तीसरे के बारे में कोई बात नहीं लिखी है। साइबर सेल की टीम अब मोबाइल के साथ उसके ये फेसबुक अकाउंट भी खंगाल रही है।
अवसाद की आशंका जिस तरह की बातें डायरी में लिखी हैं, उससे ऐसी आशंका है कि पवन बहुत डिप्रेशन में चले गए थे। इसमें जाने की वजह हैकर्स ही थे। इसलिए बहुत ही उलझाऊ बातें लिखीं। जिस पुलिस अफसर ने डायरी पढ़ी वह हैरान-परेशान हो गया। समझ ही नहीं पा रहा था कि आखिर पवन के साथ किसने, किस वजह से और किस तरह से ब्लैकमेलिंग की। ये पढ़कर बस यही स्पष्ट हो रहा है कि कहीं न कहीं वह साइबर अपराधियों के जाल में फंसे जरूर थे।
79 हजार का लिया था लोन
परिजनों ने बताया कि एक फाइनेंस कंपनी से पवन ने 79 हजार रुपये का लोन लिए थे। इस बारे में डायरी में भी पवन ने लिखा है। हालांकि साथ में ये भी लिखा है कि उसने लोन चुका दिया है। कई जगह पर लिखा है कि कहीं इसी कंपनी के लोग ही तो नहीं उसको प्रताड़ित कर रहे हैं। ताकि रकम वसूली जा सके। पुलिस ने इस तथ्य को भी अपनी जांच में शामिल किया है।