फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow News: अपनों के सितम का शिकार नौ हजार पूर्व बिजलीकर्मी

विज्ञापन
विज्ञापन
नरेश शर्मा
विज्ञापन


लखनऊ। गलत बिजली बिल की समस्या से बिजली विभाग से सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी भी जूझ रहे हैं। लखनऊ में ही अनाप-शनाप बिल से परेशान पेंशनरों की संख्या करीब 9 हजार है। आलम यह है कि जो चपरासी थे, सिस्टम में गलत कोडिंग की वजह से उनका अधिशासी अभियंता का बिल बन जा रहा है। बिल संशोधित कराने जाते हैं, तो टका सा जवाब मिलता है कि सिस्टम में इसको सुधारने की व्यवस्था ही नहीं है।

पहले रिटायर्ड बिजलीकर्मी अपना बिल विभाग के कार्यालय में जमा करते थे। पर, पिछले एक साल से इनका भी बिल ऑनलाइन जनरेट होने लगा। गलत बिजली बिल की समस्या से परेशान पेंशनरों का कहना है कि रिटायर्ड अफसर से लेकर कर्मचारी तक के कोड सिस्टम में गलत फीड हो गए हैं। सबसे ज्यादा समस्या इसी गलत कोडिंग की वजह से हो रही है। इससे सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता का बिल रिटायर्ड चपरासी के फिक्स रेट से बन रहा है, तो रिटायर्ड चपरासी का अधिशासी अभियंता के रेट से।
विज्ञापन


पेंशनरों का यह भी कहना है कि रिटायर्ड बिजलीकर्मियों के बिल में एसी के उपभोग को लेकर कॉलम होना चाहिए। इससे पता चलता है कि किसके यहां कितने एसी का इस्तेमाल हो रहा है। इसी के हिसाब से बिल बनना चाहिए था। पर, ऑनलाइन सिस्टम में यह कॉलम ही नहीं है। इससे मनमाने तौर पर बिल बन रहा है। यही नहीं रियायती बिजली के हकदार पेंशनरों से फिक्स एवं विद्युत चार्ज दोनों वसूले जा रहे हैं। जबकि नियमत: विद्युत कर जो कि फिक्स होता है, उसे ही वसूलने का प्रावधान है।





अजब-गजब



केस-1 : विभाग में थे मुख्य अभियंता, बिल बना रहे चपरासी का



सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता पुरेंदू शंकर विकासनगर में रहते हैं। इनका चतुर्थ (चपरासी) श्रेणी में ऑनलाइन बिल बन रहा है। यानी पुरेंदू शंकर का अधिक बिल बनना चाहिए, पर गलत कोडिंग की वजह से कम बन रहा है।

केस-2 : लेखा विंग के रिटायर्ड अफसर को थमाया 3.66 लाख का बिल



अलीगंज कॉलोनी निवासी महेश चंद गोयल उपमुख्य लेखाधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। बिजली विभाग ने इस साल 13 मई को उनको 3,66,539 रुपये का बिल थमाया था। इन्होंने अप्रैल से जून तक तीन माह का बिल खुद बनवाया तो वह 5232 रुपये का ही बना।

केस-3 : जिन्होंने लखनऊ में ऑनलाइन सिस्टम की थी शुरुआत, आज खुद लाचार

निरालानगर निवासी सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता राजीव मेहरोत्रा ने लखनऊ में ऑनलाइन बिलिंग केंद्रों की शुरुआत की थी। इस व्यवस्था को आकार देने और उसे प्रभावी बनाने में उनकी अहम भूमिका रही। अब रिटायरमेंट के बाद राजीव अपना गलत बिल संशोधित नहीं करा पा रहे। उनको जून में 3,50,788 रुपये का बिल भेजा गया है।





प्रदेश के जिन 50 खंडों में ऑनलाइन बन रहे बिल उनमें 90 फीसदी तक शिकायतें



प्रदेश भर में रियायती बिजली के हकदार पेंशनरों की तादाद लगभग 75 हजार है। प्रदेश में अभी 50 खंडों के पेंशनरों के बिजली बिल ऑनलाइन जनरेट होने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि जिन 50 खंडों में पेंशनरों के बिल ऑनलाइन जनरेट हो रहे हैं, उनमें गलत बिल की शिकायतें 90 फीसदी तक है। सिस्टम की खामी की वजह से इन सभी को जूझना पड़ रहा है।



एक साल से समस्या...कोई सुधार नहीं

विद्युत पेंशनर्स परिषद के महामंत्री कप्तान सिंह बताते हैं, हम इस समस्या के बारे में यूपी पावर कॉर्पोरेशन के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल को बता चुके हैं। प्रदेश के लगभग 75 हजार पेंशनरों से कॉर्पोरेशन को औसतन 90 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल होता है। पिछले एक साल से पेंशनरों के अनाप-शनाप बिल बन रहे हैं। वे इधर-उधर भटक रहे हैं, पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
विज्ञापन




सिस्टम में विकल्प नहीं होने से आ रही समस्या



महानगर खंड, ट्रांसगोमती जोन के अधिशासी अभियंता उपेंद्र तिवारी बताते हैं, दरअसल पेंशनर का बिल संबंधित खंड के अधिशासी अभियंता ऑनलाइन जनरेट करते हैं। बिल यदि गलत बन जाए तो उसको संशोधित करने का सिस्टम में विकल्प ही नहीं है। इससे पेंशनरों के साथ ही खंडीय अभियंताओं को भी परेशानी हो रही है।






विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें