इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान बैंक का फर्जी दस्तावेज दाखिल करने के मामले में याचियों की गिरफ्तारी का आदेश यूपी व उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशकों को दिया है। कोर्ट ने अगली सुनवाई 19 अक्तूबर को तय करते हुए कहा, अगर इस तारीख तक याचियों को गिरफ्तार कर पेश नहीं किया जाता है तो सक्षम अधिकारियों को तलब किया जाएगा। यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ ने सुरेश कुमार तंवर व बलबीर सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।
मामले में याचियों के खिलाफ खनन पट्टे को लेकर धोखाधड़ी कर लाखों रुपये हड़पने का आरोप लगाया गया है। याचियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मामले की शिकायतकर्ता को 35 लाख रुपये देने की बात कही थी। इससे पहले उन्हें हाईकोर्ट के मध्यस्थता केंद्र में एक लाख रुपये जमा करने थे। याचियों ने न तो लखनऊ निवासी वादिनी के पक्ष में 35 लाख रुपये का ड्राफ्ट बनवाया और न ही मध्यस्थता केंद्र में पैसे जमा किए। बल्कि याचियों ने आईसीआईसीआई बैंक का एक पत्र पेश किया गया।
इसमें याचियों के खाते सीज होने की बात कही गई थी। कोर्ट कोे प्रथम दृष्टया यह पत्र फर्जी लगा और उसने बैंक से पत्र के बाबत स्पष्टीकरण मांगा। इस पर पत्र के फर्जी होने की पुष्टि की गई। न्यायालय ने याचियों के इस कृत्य को गंभीरता से लेते हुए उनके खिलाफ अवमानना प्रक्रिया शुरू की है। पिछली सुनवाई पर दोनों याचियों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया था।