नेपाली जेलों से फरार जाली नोटों के तस्करों ने चिंता बढ़ा दी है। 105 कैदी पाकिस्तान से जुड़े हैं। ये तस्कर आईएसआई की मदद से जाली नोट भारत में सप्लाई करते थे। दाऊद के करीबी नसीम बादशाह पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर है।
नेपाल में जेन-जी आंदोलन और आगजनी के बीच जेलों से फरार कैदियों में बड़ी संख्या जाली नोटों के तस्करों की भी है। इनमें 105 कैदियों का सीधे जुड़ाव पाकिस्तान से है, जो आईएसआई की मदद से जाली नोट भारत में सप्लाई करते थे। इनका मजबूत नेटवर्क उत्तराखंड से लेकर पश्चिम बंगाल तक है।
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भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी मुश्किल से नेपाल से सामंजस्य स्थापित कर सभी को गिरफ्तार कराया था, जिसके बाद जाली नोटों के मामलों में कमी आई थी। नेपाल के ताजा घटनाक्रम के बीच जाली नोटों के बड़े तस्कर अब जेल से बाहर हैं।
ऐसे में आशंका है कि नेपाल की अस्थिरता का फायदा उठाकर वे अपने पुराने नेटवर्क को सक्रिय कर फिर भारतीय अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसे लेकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।
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नेपाल बॉर्डर पर चौकसी बढ़ाई गई है। नेपाल सीमा पर काम कर चुके पूर्व आईबी अधिकारी संतोष सिंह बताते हैं कि एसएसबी की मदद से अभी तक 75 कैदियों को पकड़कर नेपाल को सौंपा गया है, लेकिन इनमें जाली नोटों का बड़ा तस्कर और दाऊद इब्राहिम का करीबी नसीम बादशाह हाथ नहीं आ सका है।
अभी वह नेपाल के ही अलिगढ़वा में छिपा है। इसी प्रकार आईएसआई के अहम सहयोगी यूनुस अंसारी के नेटवर्क से जुड़े आरिफ, नुरूल, लाल मोहम्मद पकड़ में नहीं आ सके हैं। ये सभी भारत के साथ ही नेपाली जाली नोटों की तस्करी से भी जुड़े हैं।
यूनुस अंसारी के नेटवर्क के भी कई शातिर जेल तोड़कर भागे
नसीम बादशाह : नेपाल के कपिलवस्तु जिले के तौलिहवा जेल में सात से अधिक हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा था। बहराइच से लेकर बलरामपुर, गोंडा सिद्धार्थनगर और सीमावर्ती महराजगंज जिले में भी कई वारदातों को अंजाम दे चुका है। नेपाल के साथ ही नसीम का भारत में भी मजबूत नेटवर्क है।
यूनुस अंसारी
भारतीय जाली नोटों के कारोबार का सरगना यूनुस अंसारी नेपाल के पूर्व मंत्री सलीम अंसारी का पुत्र है। यूनुस अंसारी लंबे समय से अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम का करीबी रहा। वह दाऊद इब्राहिम और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर भारत में नकली नोटों के नेटवर्क को संचालित करता है। यूनुस अंसारी को पहली बार 28 दिसंबर 2009 को 25 लाख की जाली भारतीय करेंसी के साथ गिरफ्तार किया गया था।
इन तस्करों पर भी रहेगी कड़ी नजर
गौगात बहादुर सिंह, चंदन बोहरा, दिलीप कार्की, संदीप कोरंगा सिंह, अमित यादव, जगदीप मिश्रा, संतोष और सालार।
फरार अपराधियों की जानकारी जुटा रहे हैं। किसी को भी भारतीय बॉर्डर पार नहीं करने दिया जाएगा। -अमित पाठक, आईजी देवीपाटन