गुरु तेग बहादुर के 401वें प्रकाश पर्व के मौके पर राज्यपाल और सीएम योगी
- फोटो : अमर उजाला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सिख परंपरा को इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि कोई भी समाज इतिहास को भुलाकर आगे नहीं बढ़ सकता है, इसलिए अपने इतिहास को हमेशा याद रखना होगा। वे शुक्रवार को 9वें सिख गुरु तेग बहादुर के 401वें प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में राजभवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री ने सिख समाज के त्याग, बलिदान की परंपरा, धर्म के प्रति समर्पण और समाज के प्रति सेवाभाव को नमन करते हुए कहा कि सिख गुरुओं का इतिहास भारत की गौरवशाली विजय गाथा का स्मरण कराता है। जब श्रीकाशी विश्वनाथ का दर्शन करते हैं, तो मंदिर को स्वर्णमंडित करने वाले महाराजा रणजीत सिंह का स्मरण भी होता है। महाराजा रणजीत सिंह, उनके वंशजों अथवा किसी सिख भाई ने कभी यह दावा नहीं किया कि हमने इस मंदिर को स्वर्णमंडित कराया है। यह कृतज्ञतापूर्ण भाव प्रेरणास्पद है। देश व धर्म की रक्षा के लिए सिख गुरुओं का बलिदान प्रेरणा है। सिख गुरुओं का त्याग अपने धर्म, संस्कृति, परंपरा तथा राष्ट्र की अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए प्रेरित करता है।
क्या ननकाना साहिब में हो सकते हैं ऐसे आयोजन
योगी ने कहा कि गुरु तेग बहादुर ने राष्ट्र की एकता और धर्म की रक्षा के लिए अपना बलिदान किया। सिख गुरुओं ने डरना और डराना नहीं सिखाया, बल्कि अपने स्वाभिमान के लिए लड़ना सिखाया। जिस प्रकार बिना भय के उल्लास और उमंग के बीच यहां हम सभी कार्यक्रम कर रहे हैं क्या संभव है कि ऐसा ही कार्यक्रम ननकाना साहिब और काबुल में भी हो सकता है।
एप का लोकार्पण किया
सीएम ने उप्र. पंजाबी अकादमी के मोबाइल एप का लोकार्पण भी किया। उन्होंने आमजन को गुरुमुखी लिपि सीखने के लिए प्रेरित भी किया।
सिख परंपरा मानवता की महान संस्कृति : राज्यपाल
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सिख परंपरा को मानवता की महान संस्कृति बताया। उन्होंने कहा कि सिख गुरुओं ने धर्म के प्रति आस्था, संस्कार, करुणा, सेवाभाव सहित मानवता के सभी गुणों से प्रकाशित किया तो राष्ट्र और धर्म की रक्षा की प्रेरणा भी दी।