मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि तकनीक के बदलते दौर में पुलिस संचार प्रणाली को भी अपडेट किया जाना चाहिए। तकनीक की मदद से मोबाइल फोन वायरलेस सेट के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। इस संचार प्रणाली को अपनाया जाना चाहिए। प्रारंभिक चरण में इसे बाराबंकी पुलिस में लागू किया जाए। मुख्यमंत्री मंगलवाार को यूपी-112, वीमेन हेल्पलाइन 1090 तथा तकनीकी सेवा शाखा के कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को अहम दिशा-निर्देश दे रहे थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता को त्वरित सहायता देने में यूपी 112 सेवा उपयोगी साबित हुई है। 112 के साथ 101, 108, 1090 और 181 आदि सेवाओं के एकीकरण, जीपीएस, रेडियो वायरलेस, मोबाइल/वेब एप जैसी तकनीक के प्रयोग ने इस सेवा को अत्यधिक व्यावहारिक बनाया है। इससे जुड़े सभी पीआरवी कर्मी, प्रोफेशनल्स, कॉल सेंटर कर्मी, सिविल पुलिस के अधिकारी एवं कर्मचारी बधाई के पात्र हैं। वर्ष 2016 में पीआरवी को पीड़ित तक मदद पहुंचाने में एक घंटे का समय लगता था, आज इसे 9:44 मिनट तक लाने में सफलता मिली है। रिस्पॉन्स टाइम को कम करने के लिए वाहनों की संख्या बढ़ाई जाए, हर पीआरवी में जीपीएस और बॉडी वॉर्न कैमरा हो। इस सेवा का दुरुपयोग न हो, इसका ध्यान रखा जाए।
महिला सिपाही होना जरूरी
मुख्यमंत्री ने रात्रि में महिलाओं को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए एस्कॉर्ट बनाने की सराहना करते हुए कहा कि इससे कामकाजी महिलाओं को लाभ हुआ है। महिलाओं को गंतव्य तक पहुंचाने वाले वाहनों में महिला सिपाही जरूर हो। समस्त हेल्पलाइन नंबर के बारे में आमजन को जागरूक किया जाए। हेल्पलाइन पर हर सूचना को गंभीरता से लिया जाए। पीड़ित के साथ संवेदनशील व्यवहार हो। प्रदेश के सभी 1758 थानों को सीसीटीवी से लैस किया जाए।
महिला बीट अधिकारियों को मिले दोपहिया वाहन
योगी ने कहा कि महिला बीट अधिकारियों द्वारा 1.29 लाख से अधिक चौपाल आयोजित करना और उसमें 19 लाख महिलाओं की सहभागिता इसकी उपयोगिता प्रदर्शित करती है। महिला बीट अधिकारियों को दोपहिया वाहन की सुविधा भी मुहैया कराई जाए। इसके लिए शासन धनराशि देगा। इस दौरान उन्होंने महिला एवं बाल सुरक्षा के कार्यों की प्रशंसा भी की।
हुक्का बार पर होगी सख्ती
वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार ने प्रदेश में हुक्का बार पर पूरी तरह अंकुश लगाने की कवायद भी शुरू कर दी है। साथ ही, होटल कारोबार से जुड़ी एक कंपनी की गैरकानूनी गतिविधियों के दृष्टिगत सख्ती बरतने की तैयारी है। उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो इस संबंध में नियमावली का ड्राफ्ट तैयार किया जा चुका है। शासन स्तर पर इस पर गहन मंथन किया जा रहा है कि कैसे इन गैरकानूनी व्यवसाय को कानून के दायरे में लाया जाए।