करोड़ों रुपये के शुल्क भरपाई का यह घपला वित्त वर्ष 2010-11 में रुड़की (उत्तराखंड) के एक संस्थान में हुआ था। इसमें प्रति विद्यार्थी 91,200 रुपये की भरपाई होनी थी लेकिन 2.30 लाख रुपये की दर से भुगतान किया गया।
करोड़ों रुपये के शुल्क भरपाई घपले में समाज कल्याण विभाग का प्रधान सहायक धर्मेंद्र सिंह सस्पेंड किया जाएगा। शासन ने इस मामले में उप निदेशक मंजूश्री श्रीवास्तव के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई का फैसला किया है। इतना ही नहीं, तत्कालीन निदेशक मिश्री लाल पासवान समेत दो सेवानिवृत्त कार्मिकों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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यह घपला वित्त वर्ष 2010-11 में रुड़की (उत्तराखंड) के एक संस्थान में हुआ था। इसमें प्रति विद्यार्थी 91,200 रुपये की भरपाई होनी थी लेकिन 2.30 लाख रुपये की दर से भुगतान किया गया। एसआईटी ने अपनी जांच में विद्यार्थियों को भी फर्जी बताया है। कुल 7.95 करोड़ रुपये का गबन मिला। गौरतलब है कि प्रदेश सरकार दूसरे राज्यों में पढ़ रहे यूपी के छात्रों के लिए भी शुल्क भरपाई की सुविधा देती है।
एसआईटी जांच में तत्कालीन योजना अधिकारी और वर्तमान में प्रयागराज की उप निदेशक मंजूश्री, तत्कालीन पटल सहायक और वर्तमान में प्रधान सहायक धर्मेंद्र सिंह, तत्कालीन अधीक्षक छात्रवृत्ति अनिल उपाध्याय और डीके गुप्ता को जिम्मेदार ठहराया गया है। इनमें अनिल उपाध्याय का निधन हो चुका है। जबकि डीके गुप्ता सेवानिवृत्त हो चुके हैं। जांच में तत्कालीन निदेशक, समाज कल्याण मिश्री लाल पासवान को भी दोषी बताया गया है और वह भी अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इसके अलावा गुरुनानक एजुकेशन ट्रस्ट के ट्रस्टी भी दोषी मिले हैं। शासन ने धर्मेंद्र सिंह को निलंबित करने और संबंधित ट्रस्ट से गबन की राशि की रिकवरी के निर्देश भी दिए हैं। इस बारे में समाज कल्याण निदेशक राकेश कुमार ने बताया कि धर्मेंद्र सिंह के निलंबन का आदेश शीघ्र ही जारी कर दिया जाएगा।