एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गई। इसमें पीड़िता का भाई, भाभी और मौसा अभियुक्त की पत्नी से सुलह करने के लिए दस लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। यह भी दलील दी गई कि पीड़िता के मेडिकल जांच में भी दुराचार की पुष्टि नहीं हुई है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में उन्नाव जिले के एक दुराचार के मामले में अभियुक्त लक्ष्मीकांत रावत की ओर से पीड़िता के भाई व अन्य परिजनों की ऑडियो रिकार्डिंग पेश की। कहा गया कि अभियुक्त से दस लाख रुपये की मांग की जा रही थी। इसी मकसद से एफआईआर दर्ज कराई थी। अभियुक्त की याचिका पर न्यायमूर्ति मोहम्मद फैज आलम खान की एकल पीठ ने परिस्थितियों व तथ्यों को देखते हुए लक्ष्मीकांत को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
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अभियुक्त के वकील प्रांशु अग्रवाल व चंदन श्रीवास्तव ने कोर्ट में दलील दी कि लक्ष्मीकांत रिश्ते में पीड़िता का दूर का बहनोई लगता है। घटना सात अक्तूबर 2020 की बताई जाती है जबकि एफआईआर आठ दिन बाद 15 अक्तूबर को दर्ज कराई गई। इसका कारण अभियुक्त को मुकदमे में फंसाकर पैसों की वसूली करना था। इस संबंध में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की गई। इसमें पीड़िता का भाई, भाभी और मौसा अभियुक्त की पत्नी से सुलह करने के लिए दस लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। यह भी दलील दी गई कि पीड़िता के मेडिकल जांच में भी दुराचार की पुष्टि नहीं हुई है।