डीसीपी के अनुसार, पूछताछ में सामने आया कि किशोर ऑनलाइन गेम और सट्टे में 50 हजार रुपये से अधिक की रकम गंवा चुका था। इसके बाद उसके चाचा के मकान पर कर्जदार अपनी रकम वापस मांगने आने लगे। इससे नाराज होकर चाचा ने उसे घर से करीब पांच किलोमीटर दूर किराये के कमरे में रहने के लिए भेज दिया था। वहां रहकर वह पढ़ाई के साथ ऑनलाइन गेम और सट्टा भी खेलता था।किशोर को प्रेमिका के साथ घूमने और मौज-मस्ती के लिए पैसों की जरूरत थी। घरवालों से रुपये मांगने पर पैसे नहीं मिले तो उसने अपने अपहरण की झूठी कहानी रच दी। उसने परिजनों को भावनात्मक रूप से ब्लैकमेल करते हुए रिश्तेदार महिला के पास पिता के नाम के खाते में रुपये भेजने के लिए ऑनलाइन भुगतान ऐप का स्कैनर कोड भी भेजा। इसके जरिए महिला से दो हजार रुपये मंगाए गए। पुलिस ने तकनीकी जांच और स्कैनर कोड से जुड़े सुरागों की मदद से किशोर का पता लगाया। वह अपनी प्रेमिका के साथ मिला।
डीसीपी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की विवेचना के दौरान सामने आए नए तथ्यों के आधार पर दर्ज मुकदमे में बीएनएस की धारा 217, 353(2) और 308(2) की बढ़ोतरी की गई है। बाल अपचारी को पुलिस संरक्षण में लेकर किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत करने की कार्रवाई की जा रही है। किशोर ने अपहरण और फिरौती की झूठी कहानी गढ़कर न केवल परिजनों को परेशान किया, बल्कि पुलिस तंत्र को भी गुमराह करने का प्रयास किया। पुलिस मामले में आगे की विधिक कार्रवाई में जुटी हुई है।