लखनऊ नगर निगम ने अब डिजिटल इंडिया का जिम्मा अपने ऊपर उठाया है। इस कदम के चलते जल्द ही नगर निगम पेपरलेस हो जाएगा। इसका अर्थ यह है कि अधिकारियों के आदेश निर्देश डिजिटली जारी होंगे, साथ ही साथ फाइलें भी डिजिटल हो जाएंगी और सिविल कार्यों के एस्टीमेट भी डिजिटल बनेंगे। नगर आयुक्त ने इसके लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं।
साथ ही साथ, नवाबों के शहर में आम जनमानस को बुनियादी सुविधाएं देने के लिए लखनऊ नगर निगम द्वारा एक नई पहल की गई है, जिसमें नाले-नालियों की नियमित साफ-सफाई, समुचित मार्ग व्यवस्था, हरियाली और पार्क का विकास और अनुरक्षण, मार्ग प्रकाश, पेयजल की व्यवस्था कराना नगर निगम का सर्वोच्च दायित्व है। इसके लिए 31 मई से 2 जून तक शहर में तीन दिवसीय विशेष सफाई अभियान चलाया जा रहा है।
इसकी जानकारी खुद नगर निगम ने सोशल माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म, कू के माध्यम से दी है। लखनऊ नगर निगम अपने प्रोजेक्ट और फाइलिंग सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए एफएपीएमएस सॉफ्टवेयर सिस्टम से काम करने जा रहा है। इस कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर प्रणाली से नगर निगम अपनी प्रोजेक्ट फाइल को ऑटोमेट और व्यवस्थित करेगा। सिविल कार्यों के एस्टीमेट भी खुद जनरेट हो जाएंगे।
अगर किसी सीसी रोड का निर्माण होना है, तो सिर्फ रोड की लंबाई और चौड़ाई का विवरण देने पर ही सॉफ्टवेयर में पहले से मौजूद संबंधित मानक दरों के आधार पर सीसी मार्ग का पूरा एस्टीमेट तैयार कर देगा। सॉफ्टवेयर के जरिए प्रोजेक्ट फाइल के बनाने से लेकर भुगतान तक पारदर्शी व्यवस्था बनेगी। इससे न केवल निगम का कार्य सही ढंग से होगा, बल्कि निगम के धन का बेहतर उपयोग तथा कार्यों का समयबद्ध निस्तारण होगा।