मेट्रो की सवारी कई मायने में बेहतर साबित होगी। यदि हम बात करें इसके बेनिफिट्स की तो निश्चित तौर पर इसके परिणाम राजधानी की सेहत के लिहाज से फायदेमंद साबित होंगे।
तेज रफ्तार वाहनों की भेंट चढ़ने वाली बेशकीमती जिंदगियां मेट्रो की वजह से बच सकेंगी। यह आश्चर्यजनक है लेकिन सच है।
दरअसल विशेषज्ञ मानते हैं कि करीब चार लाख लोग मेट्रो की सवारी करेंगे। इससे जहां आवागमन सरल होगा वहीं मार्ग दुर्घटनाओं में करीब 40 फीसदी तक की कमी आएगी।
यानी हर वर्ष करीब 100 बेशकीमती जानें हर साल बचाई जा सकेंगी। मेट्रो की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में शहर का ट्रैफिक किस तरह से कम किया जा सकेगा, इसकी विस्तृत चर्चा की गई है।
मेट्रो के एक फेरे में कम से कम 1500 यात्री सफर करेंगे। इन 1500 लोगों के चलते 16 बसें या 300 कारें या 600 दोपहिया वाहन सड़क पर कम हो जाएंगें।
चार लाख लोगों की भीड़ जब सड़क से हट कर रोजाना मेट्रो रेल में सफर करेगी तो दुघर्टनाएं भी कम हो जाएंगी। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) से मिले आंकड़ों के मुताबिक राजधानी में वर्ष-2012 के दौरान 1215 सड़क हादसे हुए थे।
इनमें 803 लोग गंभीर रूप से घायल हुए और 525 लोग अपने प्रियजनों से बिछड़ कर मौत का शिकार हो गए। मेट्रो की डीपीआर के मुताबिक, जब चार लाख लोग मेट्रो में सफर करेंगे तो 500 के करीब एक्सीडेंट रोके जा सकेंगे।
लगभग 400 लोग घायल होने से बचेंगे। यही नहीं 100 लोगों की जिदंगी भी बच जाएगी। यह आंकड़ा केवल प्रथम चरण के हिसाब से तय है।
इसके बाद में ईस्ट वेस्ट कॉरिडोर, रिंग लाइन, गोमती नगर लिंक और मिल रोड रूट के चलने के बाद दुघर्टनाओं की संख्या और भी कम हो जाएगी। जिससे शहरवासी खासी राहत महसूस करेंगे।