30 किमी प्रतिघंटा के आसपास की गति से जब ट्रेनों का संचालन किया गया तो सचिवालय से हजरतगंज के बीच की दूरी केवल तीन मिनट में पूरी हो गई। दोनों स्टेशनों के बीच करीब 1.20 किमी की दूरी है। वहीं हुसैनगंज से सचिवालय की 850 मीटर की दूरी केवल दो मिनट में ट्रेन ने पूरी की। कॉमर्शियल रन के समय भी यही गति ट्रेनों की होना प्रस्तावित है।
बृहस्पतिवार को भूमिगत सेक्शन में ट्रायल के समय मेट्रो के अधिकारी भी मौजूद रहे। खुद निदेशक रॉलिंग स्टॉक महेंद्र कुमार और निदेशक ऑपरेशंस सुशील कुमार ने पूरे समय ट्रायल रन की निगरानी की। निदेशक महेंद्र कुमार कई बार तो ड्राइवर केबिन के अंदर ही मौजूद रहे जिससे कि किसी भी गलती की आशंका को खत्म किया जा सके। करीब पांच राउंड ट्रेन ने शाम तक यहां किए।
अंधेरे में हुआ भूमिगत सेक्शन में ट्रायल
अभी स्टेशनों के ऑक्जीलरी सबस्टेशन से नहीं जुड़ पाने के चलते यहां बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से बृहस्पतिवार को अंधेरे में ही ट्रेनों का संचालन कर ट्रायल मेट्रो स्टेशनों पर भूमिगत कराए गए। अधिकारियों का कहना है कि अगले 48 से 72 घंटे में स्टेशनों को ऑक्जीलरी सबस्टेशन से बिजली आपूर्ति कर रौशन कर लिया जाएगा।
बृहस्पतिवार को भूमिगत सेक्शन में ट्रायल के समय मेट्रो के अधिकारी भी मौजूद रहे। खुद निदेशक रॉलिंग स्टॉक महेंद्र कुमार और निदेशक ऑपरेशंस सुशील कुमार ने पूरे समय ट्रायल रन की निगरानी की। निदेशक महेंद्र कुमार कई बार तो ड्राइवर केबिन के अंदर ही मौजूद रहे जिससे कि किसी भी गलती की आशंका को खत्म किया जा सके। करीब पांच राउंड ट्रेन ने शाम तक यहां किए।
अंधेरे में हुआ भूमिगत सेक्शन में ट्रायल
अभी स्टेशनों के ऑक्जीलरी सबस्टेशन से नहीं जुड़ पाने के चलते यहां बिजली आपूर्ति नहीं हो पा रही है। इसकी वजह से बृहस्पतिवार को अंधेरे में ही ट्रेनों का संचालन कर ट्रायल मेट्रो स्टेशनों पर भूमिगत कराए गए। अधिकारियों का कहना है कि अगले 48 से 72 घंटे में स्टेशनों को ऑक्जीलरी सबस्टेशन से बिजली आपूर्ति कर रौशन कर लिया जाएगा।