आखिरकार लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एलएमआरसी) लिमिटेड नाम पर रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी एक्ट (कानपुर) ने अपनी मुहर लगा दी।
इस आशय की जानकारी मेट्रो सेल में सोमवार को दे दी गई। अब मेट्रो सेल को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनी एक्ट को अपने निदेशकों संबंधित जानकारियां उपलब्ध करानी होंगी।
इसके दो से तीन दिन में लखनऊ मेट्रो नेटवर्क के लिए बनाई जाने वाली कंपनी एलएमआरसी को रजिस्ट्रार स्वीकृत कर देंगे।
दो करोड़ रुपए का शुल्क इस बाबत रजिस्ट्रार में जमा कराया जाएगा। 20 अक्तूबर तक एलएमआरसी के एप्रूव हो जाने की पूरी उम्मीद की जा रही थी।
केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय की नई गाइडलाइन के हिसाब से जिस भी शहर में मेट्रो ट्रेन चलेगी, उसको चलाने वाली कंपनी को मेट्रो के अतिरिक्त ट्रांजिट ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम भी बनाना पड़ेगा।
ऐसे में केंद्र सरकार की सिफारिश थी कि, एलएमआरसी की जगह कोई और नाम दिया जाए, ताकि केवल मेट्रो तक ही यह कंपनी सीमित न रहे।
मगर मुख्य सचिव जावेद उस्मानी इससे सहमत नहीं थे। उनका कहना था कि, राजधानी की जनता इस नाम से जुड़ चुकी है। इसकी पहचान हो गई है। इसलिए इस नाम को कायम रखा जाए।
इसके बाद में अब एलएमआरसी के नाम को रजिस्ट्रार से भी एप्रूवल मिल गया। मेट्रो सेल के चेयरमैन राजीव अग्रवाल ने बताया कि, नाम एप्रूव होने के बाद हमे अपने सभी डायरेक्टर की जानकारियां रजिस्ट्रार को भेजनी होंगी। ये जानकारियां हम जैसे ही उनको भेजेंगे।
उसके दो दिन बाद में कंपनी भी एप्रूव हो जाएगी। इसका शुल्क लगभग दो करोड़ रुपए जमा कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि, 20 अक्तूबर तक यह कंपनी बन जाएगी।