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लखनऊ मेट्रो को मिली 3205 करोड़ की विदेशी मदद

Thu, 09 Jul 2015 03:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,लखनऊ
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यूरोपियन यूनियन बैंक एलएमआरसी को कर्ज देने के लिए तैयार हो गया है। करीब 3502 करोड़ रुपये का ऋण लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एलएमआरसी) को इस विदेशी बैंक से मिलने की उम्मीद है।
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प्रतिनिधियों के दो दिवसीय दौरा समाप्त होने के बाद ये  दावा एलएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने बुधवार को किया। केशव ने ये भी जोड़ा कि बैंक ने शर्त रखी है कि सबसे पहले लखनऊ मेट्रो को पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) की स्वीकृति लेनी होगी।

पीआईबी से अनुमोदन मिलने के बाद ही बैंक कर्ज देगा। पीआईबी अनुमोदन की स्थिति जानने के लिए यूरोपियन यूनियन बैंक के अधिकारी अब वित्त मंत्रालय के अधिकारियों से शुक्रवार को मुलाकात करेंगे।
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एलएमआरसी के एमडी कुमार केशव ने इस बात की जानकारी बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता दी। उन्होंने बताया कि यूरोपियन यूनियन बैंक के प्रतिनिधियों ने दो दिन तक मेट्रो परियोजना को जाना समझा।

इस दौरान उन्होंने रूट का परीक्षण कर के परियोजना के सामाजिक और पर्यावरण पर प्रभाव को भी जाना। जिसके बाद में अधिकारियों ने एलएमआरसी को भरोसा दिलाया है कि, उनको हर हाल में लोन दिया जाएगा। इसके अलावा फ्रांसीसी बैंक से भी लोन को लेकर बातचीत की जा रही है।
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इस शर्त पर मेट्रो को मिली है मदद

3205 करोड़ रुपये के लोन चार साल के समय में यूरोपियन यूनियन बैंक देगा। 23 किलोमीटर के नार्थ-साउथ कॉरिडोर के लिए ये लोन होगा। कुमार केशव ने बताया कि करीब डेढ़ फीसदी सालाना की ब्याज दर पर लोन मिलेगा।

इसका सीधा अर्थ है कि 3205 करोड़ रुपये के लोन के लिए सालाना करीब 45 करोड़ रुपये के ब्याज का भुगतान एलएमआरसी को करना पड़ेगा। इसके अलावा मूल धन की वापसी होगी।

एलएमआरसी के सामने यहां भी पीआईबी का रोड़ा अटकता नजर आ रहा है। कुमार केशव ने बताया कि, बैंक की ओर से स्पष्ट कहा गया है कि,केंद्र सरकार के अनुमोदन के बाद ही लोन अनुमोदित किया जाएगा।

इसलिए वित्त मंत्रालय के संयुक्त सचिव से विदेशी बैंक के  प्रतिनिधियों की मुलाकात शुक्रवार को होगी। जिसमें बैंक के अधिकारी केंद्र सरकार के रुख को भी परखेंगे।

मेट्रो रेल परियोजना की पीआईबी स्वीकृति को लेकर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पत्र के बावजूद अब तक पीआईबी को लेकर केंद्र सरकार का कोई जवाब नहीं आया है। ऐसे में परियोजना की प्रगति पर जबरदस्त असर पड़ने की आशंका बढ़ती ही जा रही है।

मजे की बात ये है कि,केंद्र सरकार पीआईबी स्वीकृति न देने का कोई भी कारण तक नहीं बता रही है। एमडी कुमार केशव ने बताया कि,हमारी ओर से कोई भी कमी नहीं छोड़ी गई है। सारी औपचारिकताएं पूरी हैं।

इसीलिए शहरी विकास मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को हमारी फाइल भेजी है। अब वित्त मंत्रालय से जुड़े प्रमुख अधिकारी 16 जुलाई तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में पीआईबी की क्लीयरेंस मिलने में आधा जुलाई भी निकल जाएगा ये तय है।
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