आवास विकास परिषद ने करीब डेढ़ साल पहले मेट्रो परियोजना को धन देने के नाम पर अपनी जमीनों का रेट 10 फीसदी बढ़ाया था। मगर इस वित्तीय वर्ष के चार महीने बीतने के बावजूद परिषद ने मेट्रो के लिए 120 करोड़ रुपये नहीं दिए हैं।
तीन वित्तीय वर्षों में 400 करोड़ रुपये एलएमआरसी को बतौर अंशदान देना था। दरअसल मेट्रो रेल परियोजना के दौरान उसकी आवासीय योजनाओं को बहुत लाभ होगा। मगर अंशदान देने के नाम पर वह मुख्य सचिव तक का आदेश नहीं मान रहे हैं। एलएमआरसी के अफसर कह रहे हैं कि वे हर मीटिंग में मुख्य सचिव के सामने अपनी बात रख देते हैं।
आवास विकास परिषद को जब राज्य सरकार ने 400 करोड़ रुपये मेट्रो परियोजना के लिए देने का आदेश दिया उसके बाद ही परिषद ने प्रदेश भर में आवंटियों के ऊपर इसका बोझ डाल दिया था। अनुमान के मुताबिक इस बढ़ोतरी से परिषद तीन साल में कम से कम 1000 करोड़ कमाने जा रहा है।