लखनऊ मेट्रो एयरपोर्ट से मुंशीपुलिया तक वर्ष 2018 के अंत तक दौड़ सकती है। खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ मेट्रो को दिसंबर 2018 तक इन स्टेशनों के बीच कॉमर्शियल रन शुरू कर देने के आदेश दिए हैं। इससे पहले मेट्रो ने इस रूट पर एक अप्रैल 2019 से कॉमर्शियल रन शुरू करने की डेडलाइन तय की थी।
विज्ञापन
सरकार के नए आदेश के बाद मेट्रो को अब चार महीने पहले ही काम पूरे करते हुए 14 महीने में कॉमर्शियल रन शुरू कराना होगा। लखनऊ मेट्रो के नार्थ-साउथ कारीडोर (23.5 किमी) के पूरे रूट पर कॉमर्शियल रन 2018 में ही शुरू करने के आदेश को 2019 के आम चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
लखनऊ मेट्रो के ही एक अधिकारी का कहना है कि अप्रैल 2019 से पहले आम चुनाव संभावित हैं। ऐसे में पूरे रूट पर मेट्रो चलाने के लिए इस डेडलाइन के आगे बढ़ने की आशंका भी बनी हुई है। प्रदेश और केंद्र सरकार की मंशा है कि इससे पहले ही लखनऊ में पूरे रूट पर मेट्रो चलाई जाए।
विज्ञापन
प्रोजेक्ट को जल्द पूरा कर लिया जाता है तो इसका फायदा भी चुनाव में यूपी की सीटों सत्तारूढ़ पार्टी को मिल सकता है। लखनऊ मेट्रो की ओर से काम जल्दी पूरा करने में सहयोग के लिए कम्युनिकेशन भी लगभग सभी विभागों को मुख्यमंत्री के आदेश के संदर्भ के साथ भेजा जा चुका है।
अगस्त तक पूरा होगा बिजली का काम
मेट्रो
लखनऊ मेट्रो की योजना के मुताबिक चारबाग से आगे मुंशीपुलिया तक ट्रैक्शन और स्टेशनों को बिजली आपूर्ति का काम अगस्त 2018 तक पूरा कर लिया जाएगा। इससे पहले महिला पॉलिटेक्निक में रिसीविंग सब स्टेशन (आरएसएस) का निर्माण भी पूरा कर लिया जाएगा। यहां से केडी सिंह बाबू स्टेडियम से मुंशीपुलिया के बीच स्टेशनों और लाइन की बिजली आपूर्ति होनी है।
मेट्रो की योजना के मुताबिक चारबाग से हजरतगंज के बीच सुरंग बनाने का काम भी मार्च 2018 तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके साथ लखनऊ मेट्रो पटरी बिछाने का काम भी यहां शुरू कर चुका है। यहां भूमिगत स्टेशन बनाने का काम भी लखनऊ मेट्रो को तय डेडलाइन में पूरा करना है।
लखनऊ मेट्रो के संचालन के लिए अब आरडीएसओ का ट्रायल नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि आरडीएसओ ट्रायल ट्रेनों के संचालन के लिए होता है। नार्थ-साउथ कारीडोर पर चारबाग से आगे भी वही ट्रेन चलनी हैं जो प्राथमिकता सेक्शन पर चल रही हैं। ऐसे में अलग से ट्रेनों के ट्रायल की जरूरत नहीं होगी। केवल लखनऊ मेट्रो को आयुक्त मेट्रो रेल संरक्षा (सीएमआरएस) की जांच से ही गुजरना होगा। प्राथमिकता सेक्शन पर करीब एक महीने का समय इस जांच में लगा था।
--- पर इन चुनौतियों से पार पाना होगा
- चारबाग से हुसैनगंज के बीच भूमिगत स्टेशनों का निर्माण।
- एयरपोर्ट स्टेशन का निर्माण 12 महीने में पूरा करना।
- अगस्त 2018 तक काम पूरा करने के बाद सीएमआरएस जांच समय से पूरी होना।
- सभी 20 ट्रेनों की अलस्टॉम से आपूर्ति, अभी तक सात ट्रेन ही लखनऊ आईं।
- गोमती नदी, निशातगंज फ्लाईओवर और पॉलिटेक्निक पुल पर स्पेशल स्पान का निर्माण पूरा करना।
एयरपोर्ट, अमौसी, ट्रांसपोर्टनगर, कृष्णानगर, सिंगारनगर, आलमबाग, आलमबाग बस अड्डा, मवैया, दुर्गापुरी, चारबाग, हुसैनगंज, सचिवालय, हजरतगंज, केडी सिंह बाबू स्टेडियम, विश्वविद्यालय, आईटी कालेज, बादशाहनगर, लेखराज, रामसागर मिश्र नगर, इंदिरानगर, मुंशीपुलिया के बीच मेट्रो दौड़ेगी। इसमें से चार स्टेशन भूमिगत और बाकी एलीवेटिड होंगे।