वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार सक्सेना
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उमाशंकर पांडेय बोले- माता-पिता से बड़ा कोई नहीं
'विचार मंथन' कार्यक्रम वाटर मैन उमाशंकर पांडेय ने माता-पिता के महत्व पर बोलते हुए कहा कि इस सृष्टि में माता-पिता से बड़ा कोई नहीं है। मां त्याग और निस्वार्थ प्रेम की प्रतिमूर्ति होती है, जबकि पिता संबल और सुरक्षा का आधार हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि माता-पिता को वृद्धाश्रम न भेजें। यदि भगवान गणेश की तरह बुद्धिमान बनना है, तो माता-पिता की परिक्रमा और सेवा करें। वहीं, प्रभु राम की तरह पूजनीय बनना है, तो उनके चरणों में सिर झुकाएं। असली हीरो हमारे माता-पिता ही हैं।
ध्रुव सेन सिंह बोले- आपदाओं को कोई नहीं रोक सकता
अमर उजाला की ओर से विचार मंथन निर्मल गंगा प्रदूषण मुक्त उत्तर प्रदेश कार्यक्रम में वक्ता ध्रुव सेन सिंह ने प्रकृति, पर्यावरण और प्राकृतिक आपदाओं पर बोलते हुए कहा कि प्रकृति पर्यावरण का वह भाग है जो मानव नियंत्रण से पूरी तरह परे है। कितना भी विकसित देश क्यों न हो, वह भूकंप, चक्रवात और सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं को रोक नहीं सकता।
हालांकि, प्राकृतिक नियमों और वैज्ञानिक तथ्यों को ध्यान में रखकर आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम अवश्य किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि प्रकृति हमें जल, वायु और स्थल मंडल (एटमॉस्फियर, हाइड्रोस्फियर, लिथोस्फियर) के रूप में जीवन की मूलभूत आवश्यकताएं प्रदान करती है, जो मानव अस्तित्व के लिए अत्यंत आवश्यक संतुलन बनाती हैं।
चेस्ट सर्जन डॉ. अरविंद कुमार बोले- जन्म के समय हमारा फेफड़ा पिंक होता है
चेस्ट सर्जन डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि जन्म के समय हमारा फेफड़ा पिंक होता है। लेकिन अब प्रदूषण की मार से फेफड़ों का रंग काला होने लगा है। चिंता की बात यह है कि अब नॉन-स्मोकर्स यानी सिगरेट न पीने वालों के फेफड़े भी अब काले होने लगे हैं। यही नहीं 7-8 साल के बच्चों के फेफड़ों का भी बुरा हाल है।
जल संरक्षण से नदी संरक्षण तक पर मंथन
''निर्मल गंगा, प्रदूषण मुक्त उत्तर प्रदेश'' विषय पर होने वाली परिचर्चा में नदियों को स्वच्छ और जीवंत बनाने के साथ जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने पर भी विचार हुआ। जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वाले पद्मश्री उमाशंकर पांडेय ''खेत पर मेड़, मेड़ पर पेड़'' के मंत्र के साथ बुंदेलखंड में जखनी मॉडल विकसित कर चुके हैं।
उनके प्रयासों से जखनी को देश का पहला ''जल ग्राम'' घोषित किया गया था। उनके प्रयासों से जुड़े मॉडल को अटल भूजल योजना के व्यापक अभियान से जोड़ा गया। योजना के तहत 10,000 से अधिक ग्राम पंचायतों में भूजल प्रबंधन और 1,050 से अधिक जलग्राम विकसित किए गए। तीन हजार से अधिक पानी की पाठशालाओं के माध्यम से 10 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों में जल संरक्षण की जागरूकता पैदा की।