लखनऊ में मतदान में अब कुछ घंटे ही रह गए हैं। चुनाव भले ही राजनाथ सिंह लड़ रहे हों लेकिन चर्चा अटल और मोदी की हो रही है।
फैसला ब्राह्मण व मुस्लिम मतदाताओं पर टिका है। मुस्लिम वोटर दिल की बात जुबान पर लाने से परहेज कर रहा है तो भाजपा ब्राह्मणों में बिखराव रोकने की कोशिश में जुटी है।
वहीं, अपने-अपने उम्मीदवारों के जरिये कांग्रेस, सपा और बसपा ब्राह्मणों के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
दरअसल, तीनों दलों को लगता है कि मुस्लिमों का स्वाभाविक झुकाव तो उनकी तरफ है ही, बस ब्राह्मण साथ आ जाएं तो नैया पार समझो। भाजपा को भी एहसास है कि ब्राह्मणों में बिखराव समस्या बढ़ा सकता है।
गुजरात की तरक्की तो खूब सुनी लेकिन...
शहर के भूतनाथ इलाके में रहने वाले इकबाल समेत कुछ लोग कहते हैं कि चुनाव बाद राजनाथ कुछ समीकरण बैठा सकते हैं। बीच में टोक देते हैं वहां पहुंचे एलआईसी में विकास अधिकारी अनुराग शुक्ल।
कहते हैं, ‘लोगों का मन मोदी को मजबूत देखने का है। हमें लगता कि राजनाथ भी लोगों के मूड को समझ रहे हैं।’ चर्चा फिर मुसलमानों के मूड पर पहुंच जाती है।
इकबाल कहते हैं कि भाजपा की लड़ाई कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी से होती दिख रही है। इकबाल स्वीकार करते हैं कि गुजरात की तरक्की के बारे में उन्होंने भी सुना है।
पर, इसका मतलब मोदी पर मुसलमानों का भरोसा जम जाना नहीं है।
कुछ लोग कहते हैं कि दारोमदार मुस्लिम मतदाताओं पर टिका है। वह ब्राह्मणों को देख रहा है। इसीलिए खुल नहीं रहा है
वोट तो राष्ट्रीय मुद्दों पर
इस्माइलगंज के पास मिले रामविलास यादव कहते हैं, ‘इस चुनाव में जाति नहीं, देश की राजनीति का टर्निंग पॉइंट मुख्य मुद्दा है।
वोट राष्ट्रीय मुद्दों पर पड़ना है। लोग भ्रष्टाचार से त्रस्त हैं। कानून-व्यवस्था से परेशान हैं। युवक बेरोजगारी से हताशा में हैं।
सरकारी मशीनरी की निरंकुशता भी बड़ा मुद्दा है। ‘आप’ ने भ्रष्टाचार को लेकर उम्मीद बंधाई थी। पर, जल्दबाजी कर गए।
मोदी उम्मीद बंधाते हैं। मुसलमानों के सवाल पर वह भी कहते हैं कि मुस्लिम मन भाजपा पर बहुत भरोसा नहीं कर पाएगा।
पुराने लखनऊ की चुप्पी में छिपा है फैसला
चौपटिया मोड़ के पास कपड़ों का रंगरोगन कर रहे युवकों को देखकर राव-चाव लेने की कोशिश करता हूं।
पुराने लखनऊ के मूड के बारे में पूछने पर नौजवान नईम कहता है, हमारे इलाके में पंजा है। इतने में एक बुजुर्गवार उसे डपटते हुए चुपचाप काम करने को कहते हैं। फिर कहते हैं, अभी कुछ तय नहीं है।
अन्नपूर्णा मंदिर के पास पूर्व विधायक बसंतलाल गुप्त के मकान के पास डॉ. अजय गुप्ता से मुलाकात होती है। कहते हैं कि पुराने लखनऊ की चुप्पी में ही लखनऊ का फैसला छिपा है।
बताते हैं कि इस पूरे इलाके का मुस्लिम मतदाता कांग्रेस और सपा के बीच उधेड़बुन में फंसा है। दलितों और अति पिछड़ी जातियों की बस्ती में नकुल दुबे भी लड़ रहे हैं।
वैश्य व ब्राह्मण को भले ही भाजपा का समझा जा रहा है, परंतु रीता बहुगुणा जोशी ने भी इनके बीच सेंधमारी की है।
एक पक्ष यह भी
दौलतगंज में आरबी मेमोरियल कॉलेज के संचालक डॉ. मुस्तजर हुसैन से बात होती है।
बख्शी तालाब स्थित स्वामी विवेकानंद विधि महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. हुसैन कहते हैं, अटल की जगह भले ही मोदी हों लेकिन भाजपा यहां से फिर जीतेगी, लेकिन इस बात से नाराजगी व्यक्त करते हैं कि मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण को मुद्दा बनाया जाता है।
गोधरा पर कहते हैं कि मोदी माफी मांग ही लें तो उससे मुसलमानों को क्या हासिल हो जाएगा। उसे भी तरक्की चाहिए। नौजवानों को रोजगार चाहिए।
उर्दू में प्रार्थना पत्र कौन लेता है...
पहाड़पुर चौराहे पर डॉ. वारसी मरीजों को दवा देने के साथ ही चुनावी चर्चा में व्यस्त हैं। कहते हैं, ‘सपा और बसपा से मुसलमान उकता गए हैं।’
यह कहने पर कि सपा ने उर्दू से लेकर मुस्लिमों के विकास की तमाम बातें की हैं, पास बैठे एक सज्जन तपाक से सवाल उठाते हैं कि उर्दू में प्रार्थना पत्र लिखकर ले जाइए तो सरकारी दफ्तरों में कोई लेने को तैयार नहीं होता।
ये आरक्षण को लेकर बातें तो बड़ी-बड़ी करते हैं लेकिन अब तक मिला कितना? कांग्रेस ने भी कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया है। स्थिति अभी बहुत साफ नहीं है। पर, मुसलमान भाजपा के साथ नहीं जाएगा।
कहीं रीता हावी तो चर्चा अभिषेक व नकुल की भी
सीतापुर मोड़ के किनारे पेड़ के नीचे खड़े तकरीबन 25 साल का युवक सचिन मिश्र अपने साथियों से कह रहा है, चलो खदरा चलकर राजनाथ के रोड शो का नजारा देख आएं। बताता है कि भरतनगर की तरफ रहता है।
उधर, रीता बहुगुणा को भी समर्थन मिल रहा है। सचिन का साथी अमित पांडेय कहता है, उसके मड़ियांव की तरफ विधानसभा चुनाव में अभिषेक मिश्र का बहुत बोलबाला था।
पर, इस बार भाजपा सबसे आगे है। अपेक्षाकृत थोड़े उम्रदराज कृष्णकुमार गुप्त बोल पड़ते हैं कि ऐसा नहीं है। ज्यादातर लोग आखिरी टाइम तक नहीं खुलते।
पर, इतना तय है कि मुस्लिम वोट सपा के हिस्से भी जाएगा। सचिन तर्क देता है कि भाजपा से टक्कर रीता ही ले रही हैं।
ब्राह्मणों का झुकाव उनकी ओर है, इसलिए मुसलमान भी रीता के साथ ही जाएंगे। नकुल दुबे के सवाल पर कहते हैं कि दलित वोट उनके खाते में जाएंगे।