लखनऊ लिटरेचर कार्निवाल का समापन रविवार को तवायफों के योगदान पर आधारित कोठे से ग्रामोफोन तक संगीत नाटिका से हुआ। इसमें मुख्यत: गौहरजान और कुछ अन्य तवायफों के जीवन और संगीत यात्रा को गीत-संगीत एवं कथा के साथ रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया।
हमारी उर्दू मोहब्बत ग्रुप की इस प्रस्तुति को काफी संख्या में लोगों ने देखा और सराहा। यह नाटिका लखनऊ, बनारस और आसपास के ऐसे तवायफों पर आधारित थी जो अपनी गायकी के कारण मशहूर हो गईं।
अपनी इच्छाशक्ति और संघर्ष से उन्होंने अपने फन को बन्द कमरों से निकालकर देश के कोने कोने में लोकप्रिय कर दिया। नाटिका में मुख्यत: गौहर जान की कथा थी जिनका हर रिकॉर्ड मेरा नाम गौहरजान के साथ खत्म होता था। गौहर जान ने गौहर पिया के नाम से कई रचनाएं भी कीं जिनमें कैसी ये धूम मचाई.. काफी लोकप्रिय है।