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ब्ल्यू व्हेल गेम: 27वीं स्टेज पर बच्ची को मिला भाई को डुबोने का टास्क, चौंकाने वाले खुलासे

Fri, 18 Aug 2017 04:19 PM IST
विवेक त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
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ब्लू व्हेल गेम - फोटो : सांकेतिक चित्र
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सुसाइडल गेम ब्ल्यू व्हेल लखनऊ के स्कूलों में कदम रख चुका है। आर्मी पब्लिक स्कूल के दस वर्षीय छात्र आलमबाग के सिंगारनगर निवासी पार्थ होरा की तरह कई बच्चे इस सुसाइड चैलेंज गेम में रात-दिन उलझे हुए हैं। 
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शुरुआती दौर में बच्चों के लिए एडवेंचर गेम ब्ल्यू व्हेल धीरे-धीरे उन्हें नफरत, हिंसा और खौफ की ऐसी दुनिया में ले जा रहा है जहां अंत में उन्हें अपनी जान की कीमत चुकानी होती है। पार्थ होरा खुशकिस्मत था कि माता-पिता को समय रहते उसके इस गेम के शिकंजे में फंसा होने का पता चल गया।

साइबर क्राइम एक्सपर्ट और एथिकल हैकर नितनेम सिंह बेहद चौंकाने वाली बात बताते हैं। वे कहते हैं  राजधानी का शायद ही कोई ऐसा हाई क्लास स्कूल हो, जहां के बच्चे ब्ल्यू व्हेल के जाल में न फंसे हों। 
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फिलहाल पार्थ होरा का केस सामने आ चुका है जबकि पांच और बच्चों के पैरेंट्स साइकोलॉजिस्ट और अपने परिचित पुलिस अधिकारियों के संपर्क में हैं। साइबर क्राइम एक्सपर्ट के तौर पर नितनेम भी साइबर दुनिया में राजधानी के पांच-छह बच्चों के ब्ल्यू व्हेल गेम के एडमिनिस्ट्रेटर की तलाश कर रहे हैं।

अभी गेम की शुरुआती स्टेज में हैं बच्चे, संभले पैरेंट्स

डेमो प‌िक
नितनेम बताते हैं कि इस गेम के टास्क पूरे करने वाले बच्चों का व्यवहार और मानसिक दशा बदल रही है।  कई बच्चों ने क्लासरूम में अपने साथियों से गेम के चैलेंजिंग टास्क पर चर्चा की या उल्टी-सीधी हरकतों की सेल्फी ली, तब उनके साथियों के जरिये पैरेंट्स को पता चला कि उनका लाडला मौत का खेल खेल रहा है। 

नितनेम कहते हैं, राजधानी के स्कूली बच्चों में ब्ल्यू व्हेल गेम अभी शुरुआती स्टेज में है। जैसे-जैसे स्टेज बढ़ती जाएगी, क्रूर और हिंसक मामले सामने आते जाएंगे। अगर पैरेंट्स ने वक्त पर अपने बच्चों के बदले हुए व्यवहार पर ध्यान नहीं दिया तो कई अनहोनी भी देखने को मिल सकती हैं।

एडमिनिस्ट्रेटर की तलाश में साइबर एक्सपर्ट

एसएसपी दीपक कुमार - फोटो : amar ujala
एसएसपी दीपक कुमार बताते हैं कि ब्ल्यू व्हेल गेम में अभी तक कोई ऐसी शिकायत नहीं आई है जिसमें पुलिस अपनी भूमिका निभा सके। जिन बच्चों के साथ समस्या सामने आई है, उनके पैरेंट्स साइबर एक्सपर्ट या साइकोलॉजिस्ट से संपर्क कर रहे हैं। 

साइबर एक्सपर्ट्स गेम के एडमिनिस्ट्रेटर का पता लगाने में जुटे हैं। गेम के सैकड़ों एडमिनिस्ट्रेटर हैं जो खेलने वालों को टास्क देते हैं। पार्थ होरा गेम खेलने वाले जिस ग्रुप से जुड़ा था, उसका एडमिनिस्ट्रेटर कौन था, फिलहाल इसका पता लगाने की कोशिश की जा रही है।

पार्थ होरा की अस्पताल से छुट्टी, काउंसलिंग की तैयारी

child abuse
आर्मी पब्लिक स्कूल के छात्र पार्थ होरा की बहरहाल अस्पताल से छुट्टी कर दी गई है। उसके पिता आलमबाग के सिंगारनगर निवासी गुरमीत सिंह बताते हैं कि बेटे की मानसिक स्थिति अब भी ठीक नहीं है। पूरा परिवार उसके मन में बैठी दहशत को खत्म करने की कोशिश में है। 

किसी अच्छे साइकोलॉजिस्ट से उसकी काउंसलिंग भी कराई जाएगी ताकि वह खौफ से बाहर आ सके।  पार्थ को सोमवार को उस वक्त अस्पताल में भर्ती कराया गया था जब वह अपने कमरे से निकलकर दहशत से इधर-उधर भागने लगा था। परिवारीजनों ने उसकी हालत देखकर पकड़ने की कोशिश की तो वह सहमकर कोने में दुबक गया और डर से कांप रहा था।

बच्चों को ऐसे टास्क दिए जाते हैं- मार दो या मर जाओ

blue whale
ब्ल्यू व्हेल सुसाइड चैलेंज गेम में बच्चों का ब्रेनवॉश करके उनकी भावनाओं को भड़काता है। इस गेम में 50 टास्क हैं। गेम खेलने वाले को रोज एक अजीबोगरीब टास्क पूरा करना होता है। 

आधी रात को उठकर छत पर जाना, हॉरर मूवी देखना, माता-पिता व टीचर को गालियां बकना, कब्रिस्तान में घूमना, किसी बंद इमारत में चोरी से घुसना, घर के जानवर को नुकसान पहुंचाना सहित अन्य कई टास्क पूरे करने होते हैं। 

एडमिनिस्ट्रेटर को टास्क की सेल्फी या स्क्रीन शॉट्स भेजने होते हैं। कई बार बच्चों को परिवार के किसी सदस्य, छोटे बच्चे या जानवर को मार दो अथवा खुद मर जाओ जैसे टास्क भी दिए जाते हैं। आखिरी दिन का चैलेंज गेम खेलने वाले की मौत का होता है। एडमिनिस्ट्रेटर मौत चुनने को कहता है। 

फेसबुक-इंस्टाग्राम में ग्रुप बनाकर फंसा रहे शिकार

facebook hack
यह गेम फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया माध्यमों के जरिए किशोरों तक पहुंच रहा है। इन सोशल साइट्स पर ग्रुप बनाकर एडमिनिस्ट्रेटर सैकड़ों बच्चों और किशोरों को एक लिंक का मैसेज भेजता है। 

जैसे ही कोई इस लिंक पर साइन अप करता है, वह एडमिनिस्ट्रेटर के संपर्क में आ जाता है। इसके बाद एडमिनिस्ट्रेटर संबंधित व्यक्ति को रोज एक टास्क देना शुरू कर देता है। पहले बच्चों को मजा आता है। 20-25 स्टेज के बाद हर टास्क बच्चों के लिए एक चैलेंज बन जाता है। टास्क पूरा न करने पर एडमिनिस्ट्रेटर उन्हें डराता-धमकाता है। किसी बच्चे के अकाउंट से रुपये निकालने की धमकी देता है तो किसी के परिवार को नुकसान पहुंचाने की दहशत फैलाता है।

सरकार ने इस गेम का लिंक रिमूव करने का दे रखा है आदेश
इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री ने गूगल, फेसबुक, वॉट्सएप, इंस्टाग्राम, माइक्रोसॉफ्ट और याहू को इस ऑनलाइन गेम ब्ल्यू व्हेल सुसाइड चैलेंज के लिंक रिमूव करने का आदेश जारी किया है।

मनोरोगी ने बनाया है ये खेल

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इस गेम को बाईपोलर डिसआर्डर से ग्रस्त एक रूसी नागरिक ने बनाया था। ये एक मानसिक बीमारी है। ये खेल ऐसी स्थिति पैदा करता है जिसमें मस्तिष्क उद्वेलित हो जाता है और खुद को नुकसान पहुंचाने की स्थिति पैदाकर देता है। 

ये भी एक मानसिक विकृति है। चूंकि बच्चे खुद फैसला नहीं ले पाते हैं इसलिए वह गेम के दिशा निर्देश मानने लगते हैं या फिर एक तरह से हिप्नोटाइज्ड हो जाते हैं। 

अभिभावकों को चाहिए कि वह गैजेट की दुनिया में डूब चुके अपने बच्चों पर ध्यान रखें, यदि उनके व्यवहार में बदलाव आ रहा है तो उससे बात करें, उसके साथ समय बिताएं। जिससे उसके व्यवहार के बारे में अधिक से अधिक पता चल सके।
डॉ. देवाशीष शुक्ल
मानसिक रोग विशेषज्ञ, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल
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लिफ्ट में गर्दन फंसाने से लेकर भाई को मारने तक के चैलेंज

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केस-1 : लिफ्ट में गर्दन फंसाकर गालियां देने का टास्क

कक्षा छह की छात्रा ऑनलाइन सुसाइड चैलेंज गेम ‘ब्ल्यू व्हेल’ की 24वें स्टेज में पहुंच गई और किसी को भनक नहीं लगा। गेम एडमिनिस्ट्रेटर ने उसे लिफ्ट के दोनों दरवाजों के बीच गर्दन फंसाकर अपनी मां को गालियां देने का टास्क दिया। 

छात्रा ने क्लास में अपनी दोस्तों को इस टास्क के बारे में बताया। अगले दिन जब बच्चों के पैरेंट्स स्कूल में मिले तब पता चला कि उनकी बेटी के साथ ही कई और बच्चे इस खतरनाक गेम के शिकंजे में फंसे हुए हैं।

केस-2 : खून से लथपथ घर पहुंचा और बताया मामूली एक्सीडेंट हुआ है

हाईस्कूल के एक छात्र ने दो दिन पहले ब्ल्यू व्हेल गेम की 14वीं स्टेज पार की। उसे भीड़ भरी सड़क पर तेज स्पीड में बाइक चलाकर कूदने का चैलेंज दिया गया। छात्र के पास बाइक नहीं थी। 

उसने अपने दोस्त से बाइक उधार लेकर चैलेंज पूरा किया और बुरी तरह से चोट खाया। घर पहुंचने पर उसके फटे कपड़े और खून से सने हाथ-पैर देखकर पैरेंट्स चीखे तो मामूली एक्सीडेंट बताकर उन्हें समझा दिया।

केस-3 : एडमिनिस्ट्रेटर ने कहा-भाई को पानी से भरी बाल्टी में तीन बार डुबाना

आठवीं कक्षा की छात्रा को ब्ल्यू व्हेल के एडमिनिस्ट्रेटर ने 27वें टास्क के रूप में अपने 11 महीने के भाई को पानी से भरी बाल्टी में तीन बार डुबोने का चैलेंज दिया। छात्रा ने कई बार कोशिश की लेकिन वह ऐसा नहीं कर सकी। 

अब एडमिनिस्ट्रेटर उसे धमका रहा है। कहता है कि टास्क पूरा नहीं करेगी तो वह उसके भाई और मां की जान ले लेगा। छात्रा बेहद दहशत में है। उसके पैरेंट्स साइकोलॉजिस्ट से काउंसलिंग करा रहे हैं।

(परिवारीजनों के अनुरोध पर छात्र-छात्राओं की पहचान नहीं दी जा रही है।)
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